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स्पेशल रिपोर्ट: भारत में हिचक लेकिन मुस्लिम मुल्कों में महिला लड़ाकू सैनिक

ट्यूनिसिया की महिला सुरक्षाकर्मी

नई दिल्ली। हालांकि भारतीय सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की भर्ती लम्बे अर्से से हो रही है लेकिन उन्हें सेना में लड़ाकू भूमिका देने को लेकर हिचक बरकरार है। दूसरी औऱ हमेशा पर्दे में रहने वाली खाड़ी मुल्कों की महिलाओं के लिये सेनाओं के द्वार खोले जाने लगे हैं। ट्यूनिसिया की वायुसेना में महिला पायलटों की संख्या अब 40  तक पहुंच गई है जबकि भारत में केवल तीन महिलाओं को ही लड़ाकू पायलट बनने का मौका अब तक मिला है।





 पिछले सप्ताह मुस्लिम देश ट्यूनिसिया के रक्षा मंत्री फरहत होरचानी  ने कहा कि ट्यूनिसिया सरकार को  फैसला करना है कि सेनाओं में महिलाओं की भर्ती अनिवार्य की  जाए या नहीं। होरचानी ने कहा कि ट्यूनिसिया का संविधान कहता है कि राष्ट्र सेवा हर नागरिक का कर्तव्य है। यह कर्तव्य हर नागरिक चाहे वह महिला हो या पुरुष पर लागू होता है। इसलिये अब यह वक्त आ गया है कि सेनाओं में महिलाओं की भर्ती को अनिवार्य  करने का फैसला लिया जाए।

ट्यूनिसिया अकेला नहीं है जो सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की भर्ती अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है। पिछले अगस्त माह में ही मोरक्को ने एक मसौदा को मंजूरी दी है जिसमें पुरुष और स्त्रियों सभी को सैन्य सेवा करना जरूरी बनाने का  प्रस्ताव है।

इसके पहले 2014  में संयुक्त अरब अमीरात के बिंत अल अजवर  मिलि्ट्री स्कूल ने महिलाओं के लिये नौ महीने की वालंटरी सेवा के लिये भर्ती शुरू की थी।

 इन सब के बाद खाड़ी के मुल्कों  में सैन्य सेवा को अनिवार्य करने के मसले पर बहस छिड़ गई है। कई देशों ने सेनाओं में महिलाओं को भर्ती होने के अधिकार को  स्वीकार किया है। हालांकि  खाड़ी के मुल्कों में सेनाओं में महिलाओं को पुरुषों के बराबर दर्जा देना अभी काफी दूर की बात है क्योंकि वहां के समाज  में महिलाओ को पुरुषों के समकक्ष अधिकार नहीं मिले हैं।

 लेकिन अल्जीरिया और जार्डन जैसे देश हैं जहां सीनियर रैंकों तक मुस्लिम अफसरों को पदोन्नति मिलने लगी है। अल्जीरिया  की पीपल्स नेशनल आर्मी ( पीएनए) ने 2006  में ही महिलाओं औऱ पुरुषों को बराबर का हक देने की बात मान ली थी। वहां महिलाओं को स्कूल आफ कैडेट्स आफ द नैशन, द नेशनल जेंडार्म्स आर्मी और नेवल एकेडमी में भर्ती शुरू की और तब से पांच महिला अफसरों को जनरल रैंक तक पदोन्नति दी गई है।

दूसरी ओर जार्डन की सेना ने 2006  से 2016  के बीच  सेना में महिलाओं की भर्ती बढ़ाने के लिये एक रणनीति पर काम किया है। इसका इरादा है कि सेनाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाए। इसका नतीजा है कि जार्डन की सशस्त्र सेनाओं में भर्ती के लिये महिलाओं द्वारा  पुरुषों की तुलना में अधिक आवेदन मिलने लगे हैं। जार्डन  की सेना में अब 48 सौ महिला सैनिक भर्ती हो चुकी हैं। इसमें से 1,200  अफसर हैं और  24 सौ जवान। यह जार्डन की सेना का कुल तीन प्रतिशत है।

लेबनान की सेना ने भी महिलाओं को भर्ती करने के लिये नई नीति अपनाई है। लेबनान में अब सेना में महिलाओं की संख्या 3,000  से अधिक हो गई है।  इस साल वहां महिला वालंटियरों के कोर्स में 1,640  अफसरों की भर्ती की गई है। इनमें से 150  रिपब्लिकन गार्ड ब्रिगेड में भर्ती की जा रही हैं। वहां युद्ध के अग्रिम मोर्चे पर पुरुषों के साथ महिलाओं को भी तैनात किया जाने लगा है।

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