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स्पेशल रिपोर्ट: अभ्यास में तेजस की लड़ाकू क्षमता का गहन परीक्षण

तेजस
लड़ाकू विमान तेजस (फाइल)

नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान से लगने वाली नभ सीमाओं पर  चल रहे गगनशक्ति युद्धाभ्यास में वायुसेना द्वारा इन दिनों देश में बने लाइट कम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस की लड़ाकू शक्ति का गहन परीक्षण चल रहा है।





गगनशक्ति युद्धाभ्यास के पहले चरण में ही वायुसेना ने स्वदेशी तेजस विमान को उतार कर युद्ध जैसा असली माहौल तैयार किया और इसकी संचालन क्षमता और ल़ड़ाकू मिशन में इस विमान की उपयोगिता को परखा। मेक इन इंडिया की एक अद्भुत मिसाल के तौर पर तेजस विमान से हवाई समाघात के दौरान नजदीक औऱ दूर तक मार करने वाली मिसाइलों को छोड़कर भी परीक्षण किया जा रहा है। इस दौरान तेजस से आसमान से जमीन पर प्रभावी तरीके से मार करने की क्षमता का भी परीक्षण किया गया। गगनशक्ति अभ्यास 21 अप्रैल तक चलेगा। इस अभ्यास में वायुसेना के बेड़े में लगभग सभी 11 सौ लड़ाकू, परिवहन विमान और हेलीकाप्टरों कों शामिल किया गया है। यह अभ्यास वायुसेना थलसेना और नौसेना को साथ ले कर रही है। हाल के सालों में तीनों सेनाओं का यह सबसे बडा अभ्यास बताया जा रहा है। चीन और पाकिस्तान से चल रहे सैन्य तनाव के मद्देनजर गगनशक्ति अभ्यास की विशेष अहमियत है।

यहां वायुसेना के एक प्रवक्ता ने गगनशक्ति युद्धाभ्यास के बारे में बताया कि वायुसेना ने हमेशा से ही स्वदेशी शस्त्र प्रणालियों पर अपना भरोसा जताया है। तेजस को बहुआयामी भूमिका वाला विमान बताते हुए वायुसेना ने कहा कि गगनशक्ति के दौरान तेजस को तैनात करने के बाद अब इसे असली युद्ध के दौरान वायुसेना की रणनीति का हिस्सा बनाया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि तेजस विमान के दो स्क्वाड्रन को शामिल करने की मंजूरी वायुसेना ने दी है लेकिन अभी इसके चार विमान ही वायुसेना को सौंपे जा सके हैं। तेजस का पहला स्क्वाड्रन कर्नाटक के सुलुर वायुसैनिक अड्डे पर तैनात होगा। इस विमान का विकास एरोनाटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने किया है और इस विमान को अभी फाइनल आपरेशनल क्लीयरेंस (एफओसी) मिलनी बाकी है। वायुसेना को तेजस की शुरुआती किस्म मार्क-1 सौंपी गई है लेकिन इसके मार्क वन-ए के विकास की तैयारी चल रही है। एलसीए का मार्क-2 के विकास पर भी काम चल रहा है जो 2025 तक वायुसेना को सौंपे जाने की उम्मीद है।

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