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स्पेशल रिपोर्ट: देश में बनी अपनी यह तोप देगी अमेरिकी तोप को टक्कर

होवित्जर तोप

नई दिल्ली। अमेरिकी हल्की होवित्जर तोपों को टक्कर देने वाली हल्की होवित्जर तोपों का भारत में स्वदेशी तकनीक से विकास कर लिया गया है। प्राइवेट सेक्टर की एक कम्पनी ने यह उल्लेखनीय कामयाबी हासिल की है। इस कम्पनी को उम्मीद है कि भविष्य में भारतीय थलसेना स्वदेशी अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपों को ही हासिल करेगी।





कल्याणी ग्रुप द्वारा निर्मित यह तोप (भारत यूएलएच) 155 मिमी/39 कैलिबर की है। इन तोपों की मदद से सीमा पार स्थित पहाड़ी चोटियों पर दुश्मन के सैन्य ठिकानों को तहस-नहस किया जा सकता है। गौरतलब है कि अमेरिकी बीएई सिस्टम्स से दो साल पहले भारतीय थलसेना को 145 होवित्जर तोपें मुहैया कराने का आर्डर दिया गया था। ये तोपें खासकर पर्वतीय चोटियों पर तैनात की जाती हैं। चूंकि इन तोपों को पहाड़ी चोटियों पर तैनात किया जाता है इसलिये इनका वजन कम रखा जाता है। चोटियों पर कुछ मिनटों के भीतर इन्हें हेलीकाप्टर की मदद से पहुंचाया जाता है। इसी खासियत की वजह से सेनाओं ने अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपों को तैनात करना शुरू किया है।

स्वदेशी होवित्जर तोप दो किस्मों में विकसित की गई है- स्टील और टाइटैनियम। स्टील से बनी तोप 6.8 टन वजन की है जबकि टाइटेनियम से बनी तोप पांच टन से कम वजन की है। इन तोपों के निर्माण में विशेष लाइट वेट मटीरियल का इतेमाल किया गया है। पहाड़ी इलाके में भारतीय थलसेना की रणनीतिक आवश्यकताओं के अनुरुप इन तोपों का डिजाइन किया गया है।

रणक्षेत्र में इन्हें हेलीकाप्टरों की मदद से तैनात किया जाता है। इन्हें रेलवे और सड़क मार्ग से भी रणक्षेत्र में भेजा जा सकता है। डिजिटल फायर कंट्रोल, गोला दागने की ऊंची दरें, विश्वसनीयता और आसान मेनटेनेंस इनकी खासियत है।

इसकी मारक दूरी 24.7 किलोमीटर है और विशेष तरीके से इ्न्हें दागा जाए तो ये 30 किलोमीटर तक गोला दाग सकती हैं। ये तोपें प्रति मिनट 75 गोले दाग सकती हैं।

अमेरिकी एम-777  होवित्जर तोपें कुछ हल्की यानी 4.2 टन वजन की हैं और इसकी विभिन्न किस्में 24  से 40 किलोमीटर दूर तक वार कर सकती हैं।

चूंकि चीन और पाकिस्तान से लगी अधिकतर सीमा पर्वतीय इलाके हैं इसलिये भारतीय थलसेना को हल्की तोपों की भारी संख्या में जरूरत होगी। इसलिये माना जा रहा है कि भविष्य में भारतीय थलसेना की जरुरतें स्वदेशी भारत यूएलएच के द्वारा पूरी की जा सकेंगी।

कल्याणी ग्रुप के मुताबिक थलसेना ने इटारसी में जून, 2018  में ही इन स्वदेशी तोपों का परीक्षण कर देखा है। थलसेना ने इसे संतोषजनक पाया है।

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