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स्पेशल रिपोर्ट: भारतीय और अमेरिकी नौसेनाएं बढ़ाएंगी आपसी सहयोग का दायरा

यूएस नेवी सील
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। अमेरिकी नौसेना के सातवें बेड़े के कमांडरों ने यहां भारतीय नौसेना  के आला अधिकारियों के साथ दिवपक्षीय नौसैनिक सहयोग पर अहम बात की है। यह बातचीत यहां नौसैनिक मुख्यालय में 12  दिसम्बर को अमेरिकी सातवें बेड़े के वाइस एडमिरल फिल सावर और भारतीय नौसेना के वाइस चीफ वाइस एडमिरल जी अशोक कुमार  की अगुवाई में दो दिनों तक चली।





यहां अमेरिकी नौसैनिक अधिकारियों ने बताया कि  दोनों नौसेनाओं द्वारा गठित कार्यक्रारी संचालन ग्रुप (ईएसजी) की  बैठक में दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारियों ने आपसी साझा अभ्यास का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है और आपसी आदान-प्रदान और एक दूसरे के बंदरगाहों पर सद्भावना दौरे  की गतिविधियों को विस्तार देने का संकल्प किया है।

इस बातचीत के  बाद एडमिरल फिल सावर ने कहा कि साल भर चलने वाले नौसैनिक सहयोग कार्यक्रमों से दोनों देशों की सामरिक साझेदारी मजबूत होती है। हम हिंद प्रशांत इलाके में सुरक्षा प्रदान करने को प्रतिबद्ध हैं। दोनों देशों के बीच इस तरह की दिवपक्षीय बैठक साल 1995  से होती रही है। इसकी पिछली बैठक हवाई स्थित पर्ल हार्बर में सात जनवरी को हुई थी। इस दौरान कैरियर स्ट्राइक  ग्रुप आपरेशंस, समुद्री इलाके की जानकारी, समुद्र में लॉजिस्टिक्स सुविधा, और मालाबार नौसैनिक अभ्यास का दायरा बढ़ाने पर सहमति हुई थी।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक दोनों नौसेनाओं के लिये साल 2018  काफी व्यस्त साल था। दोनों देशों के  बीच हाल में सम्पन्न लॉजिस्टिक्स  समझौता लेमोआ के तहत बीच सागर में एक दूसरे के पोतों के बीच संसाधनों का आदान-प्रदान हुआ। मालाबार के बाद भारतीय नौसेना ने अमेरिकी अगुवाई में आयोजित  बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास  रिमपैक में भी भाग लिया । इसके बाद नवम्बर में अमेरिकी नौसेना के पी-8 ए और भारतीय  नौसेना के पी-8 आई टोही विमानों ने गोवा के तट पर पेशेवर आदान-प्रदान किया।

अमेरिकी लेफ्टिनेंट कमांडर जेरी त्जेंग ने कहा कि अमेरिका-भारत साझेदारी पहले से कहीं  अधिक आज  काफी महत्वपूर्ण हो गयी  है। ईएसजी जैसी बैठक में आने वाले सालों में आपसी सहयोग के नये कार्यक्रमों पर विचार करने का मौका मिलता है।

अमेरिका का सातवां बेडा 2018  में अपनी स्थापना के 75  वें साल में पहुंच गया। यह अमेरिकी नौसेना का सबसे बड़ा  नौसैनिक बल है जो   12  करो़ड  40  लाख वर्ग किलोमीटर इलाके पर अपने 50 से 70  पोतों और पनडुब्बियों के जरिये चौकसी रखता है।

इस बेड़े के पास करीब 140  विमान  और करीब 20,000  नौसैनिक हैं।

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