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स्पेशल रिपोर्टः प्रतिबंधों के बीच भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग बैठक

भारत-अमेरिका का फ्लैग
फोटो प्रतीकात्मक

नई दिल्ली। रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत की रक्षा तैयारी पर पड़ने वाले सम्भावित असर के बीच भारत और अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने यहां उच्चस्तरीय बैठक की। रक्षा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में रक्षा सहयोग के लिये डीटीटीआई की बैठक की काफी अहमियत है।





भारत और अमेरिका के बीच चल रहे दिवपक्षीय सहयोग के तहत यह बैठक रक्षा तकनीक और व्यापार पहल (डीटीटीआई) के तहत हुई। इस कड़ी के तहत यह सातवीं बैठक थी। इस बैठक की सहअध्यक्षता भारतीय रक्षा उत्पादन सचिव डा. अजय कुमार और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के तहत रक्षा अधिग्रहण विभाग की अवर मंत्री सुश्री एलन एम लार्ड ने की। साल में दो बार होने वाली यह बैठक बारी-बारी से भारत और अमेरिका में होती है। इस बैठक का उद्देश्य दिवपक्षीय रक्षा व्यापार सम्बन्धों पर दोनों पक्षों के नेतृत्व स्तर पर ध्यान लगातार बनाए रखना है। इसका उद्देश्य रक्षा साज सामान के सहउत्पादन और साझा विकास को भी बढ़ावा देना है।

इस मौके पर रक्षा उत्पादन सचिव अजय कुमार ने कहा कि भारतीय रक्षा उद्योग और मेक इन इंडिया  को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिये भारी रक्षा बजट की योजना के मद्देनजर विदेशी रक्षा कम्पनियों की साझेदारी से भारतीय रक्षा उद्योग का योगदान काफी अधिक होने की उम्मीद है। इसका देश की अर्थव्यवस्था में भी समुचित योगदान होगा और इसका अन्य क्षेत्रों को भी लाभ होगा।

अमेरिकी अवर मंत्री ने कहा कि भारत अमेरिका रक्षा साझेदारी में रक्षा सहयोग एक प्रमुख खम्भा है और यह समुचित गति से चल रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत को मेजर डिफेंस पार्टनर घोषित किया है और उम्मीद करता है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि डीटीटीआई एक महत्वपूर्ण मंच है जिसका भारत और अमेरिका के रक्षा व विदेश मंत्रियों के बीच टू प्लस टू डायलाग में योगदान होता है।

डीटीआईआई के तहत भारत और अमेरिका के रक्षा प्रतिनिधियों के बीच कई साझा कार्यदल का गठन हुआ है जिसके तहत सेनाओं के लिये आपसी सहमति पर प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है। डीटीआईआई के तहत प्रोजेक्टों को गति देने के लिये इंडस्ट्रियल सेक्युरिटी अनेक्स और स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर तैयार करने पर काम चल रहा है।

वायुसेना के लिये सर्विलांस प्लेटफार्म पर काम कर रहा साझा कार्यदल समुचित प्रगति कर चुका है। अमेरिकी नौसेना के लिए एयरक्राफ्ट कैरियर टेक्नालाजी पर गठित साझा कार्यदल के बीच रचनात्मक सहयोग चल रहा है। जमीनी प्रणालियों के मोर्चे पर और रक्षा शोध एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के तहत सहयोग के लिये दोनों पक्षों ने प्रोजेक्टों की पहचान की है।

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