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स्पेशल रिपोर्ट: भारत को मिला 2 रूसी स्टील्थ फ्रिगेट बनाने का सौदा

रूसी स्टील्थ फ्रिगेट

नई दिल्ली। रूस के सहयोग से गोवा शिपयार्ड में रूसी डिजाइन वाले दो अतिरिक्त स्टील्थ फ्रिगेट बनाने के लिये यहां भारत और रूस के बीच अंतरसरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से लैस प्रोजेक्ट 1135.6 के तहत बनने वाले इन फ्रिगेटों के निर्माण पर सहमति 15 अक्टूबर, 2016 को हुई थी। इन फ्रिगेटों को जून औऱ दिसम्बर, 2026 तक सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।





पी- 1135.6 के तहत इन फ्रिगेंटों को भारतीय नौसेना की जरूरतों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। ये युद्धपोत समुद्री युद्ध के हर आयाम में पारंगत होंगे। ये पोत हवाई, सतही और पानी के नीचे होने वाले युद्ध के लिये तैयार किये जा रहे हैं। ये पोत समुद्र तटीय औऱ सूदूर सागर में संचालित करने लायक बनेंगे। ये पोत किसी नेवल टास्क फोर्स का हिस्सा बनेंगे।

पोत में स्टील्थ क्षमता प्रदान करने के लिये स्पेशल हल डिजाइन, सीमित रेडार क्रास सेक्शन, लो इलेक्ट्रोमैगनेटिक, इन्फ्रारेड और पानी के भीतर आवाज को रोकने वाली विशेषताओं से लैस हैं। इन पोतों पर अत्याधुनिक शस्त्र प्रणालियां और सेंसर लगे होंगे। पूरे जीवन काल में इन पोतों को चलाते रहने के लिये भारतीय नौसेना ने ट्रेनिंग और मरम्मत औऱ देखरेख के लिये समुचित ढांचागत सुविधा विकसित कर ली है।

गोवा शिपयार्ड द्वारा भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति के तहत इन पोतों का निर्माण किया जाना है। इस तरह के पोत भारतीय नौसेना में एक ही वर्ग के पोतों की सर्वाधिक संख्या के होंगे।इन पोतों पर अत्याधुनिक सोनार प्रणाली औऱ समाघात प्रबंध प्रणाली लगी होगी।

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