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Special Report: श्रीलंका के मताला हवाई अड्डे से भारत ने खींचा हाथ

मताला राजपक्ष इंटरनेशनल एयरपोर्ट
मताला राजपक्ष इंटरनेशल एयरपोर्ट (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। श्रीलंका में चीन के अधीन हमबनटोटा बंदरगाह के काफी नजदीक मताला राजपक्ष इंटरनेशल एयरपोर्ट से भारत ने हाथ खींच लिया है। श्रीलंका के सरकारी हलकों से मिली रिपोर्टों के मुताबिक भारत इस हवाई अड्डे के संचालन में रुचि ले रहा है इसलिये भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण से इसके संचालन के बारे में प्रस्ताव मांगा गया है।





लेकिन यहां नागरिक विमानन मंत्री जयंत सिन्हा ने लोक सभा में एक लिखित सवाल के जवाब में इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया कि श्रीलंका में चीन के नियंत्रण वाले हमबनटोटा बंदरगाह के ठीक निकट मताला हवाई अड्डा भारत के नियंत्रण में आने से चीनी गतिविधियों पर नजदीक से नजर रखी जा सकेगी।

लोकसभा में बीजेपी सांसद पूनम महाजन ने इस आशय का सवाल पूछा था जिसके जवाब में जयंत सिन्हा ने कहा कि इस तरह का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इस आशय की रिपोर्टें हैं कि चूंकि मताला हवाई अड्डा जीवंत नहीं है और वहां से इक्की दुक्की उडानें ही होती हैं इसलिये इसका संचालन करने वाली कम्पनी को भारी वित्तीय नुकसान होगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण मताला हवाई अड्डा पर एक फ्लाईंग स्कूल के अलावा रिपेयर,  ओवरहाल और मेनटेनेंस सुविधा स्थापित करेगा, जयंत सिन्हा ने इससे इनकार किया। मताला हवाई अड्डा कोलम्बो से 241 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में है और हमबनटोटा के कुछ किलोमीटर नजदीक है, जिसे दुनिया का सबसे खाली हवाई अड्डा कहा जाता है। मताला हवाई अड्डे का निर्णाण चीन से ऊंची ब्याज दर पर लिये गये व्यावासयिक कर्ज पर किया गया था लेकिन यहां से यात्री विमानों के उड़ान नहीं भरने से यह घाटे में चल रहा था।

उल्लेखनीय है कि हमबनटोटा बंदरगाह को चीन ने 99 साल के पट्टे पर ले लिया है और इसे लेकर श्रीलंका में काफी विवाद चल रहा है। इस बंदरगाह को लेकर भारत में एक बडी चिंता है कि भविष्य में चीन इसका इस्तेमाल अपने लिये नौसैनिक सुविधा बनाने और अपने युद्धपोतों को ठहराने के लिये करेगा। इस नजरिये से भारतीय सामरिक हलकों में यह अपेक्षा की जा रही थी कि मताला हवाई अड्डे पर भारत का नियंत्रण होने से चीनी गतिविधियों पर पूरी नजर रखी जा सकेगी।

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