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Special Report: चांद के लिये भारत औऱ जापान का संयुक्त मिशन

त्रिपुंड

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 को अतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा 95 प्रतिशत सफल बताए जाने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की अगली उड़ान चद्रयान -2 से भी अधिक महत्वाकांक्षी होगी। इस अभियान के तहत चंद्रमा के ध्रुवीय इलाके से सतह के नमूने पृथ्वी पर लाए जाएंगे। इस अभियान के  लिये इसरो और जापान की अंतरिक्ष एजेंसी  जापान  एरोस्पेश एक्सप्लोरेशन एजेंसी ( JAXA)   मिल कर काम करेंगी।





यहां जापानी दूतावास ने इसरो औऱ जाक्सा के बीच साझा अभियान की औपचारिक तौर पर पुष्टि की।  सोमवार को जारी एक बयान में  जापानी दूतावास ने चंद्रयान-2 की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिये इसरो को बधाई दी है।

 उम्मीद की जा रही है कि भारत और जापान के बीच यह संयुक्त अंतरिक्ष अभियान 2024 तक लांच हो जाएगा। गौरतलब है कि इसरो ने 2022 में मानवयुक्त अंतरिक्ष  कार्यक्रम के तहत उपग्रह छोडने का ऐलान किया है।

इसरो और जाक्सा ने अपने संयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम को लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन कहा है। इसरो ने  भी कुछ दिनों पहले एक बयान में कहा था कि इसरो और जाक्सा  चंद्रमा के  ध्रुवीय इलाके के सर्वेक्षण के लिये  संयुकत् उपग्रह मिशन   पर काम करेंगे। इस संयुक्त मिशन पर विचार 2017 से ही भारत और जापान की अंतरिक्ष एजेंसियों ने शुरु कर दिया था।

 लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन ऐसे वक्त शुरू करने का ऐलान किया गया है जब चंद्रमा के अध्ययन में दुनिया भर में नये सिरे से रुचि पैदा हुई है।

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