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स्पेशल रिपोर्ट: समुद्री डाकुओं से मुकाबला के लिये भारत औऱ यूरोपीय सेनाएं एक साथ

समुद्री डाकू
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। हिंद महासागर में समुद्री डाकुओं से मुकाबला के लिये भारत औऱ यूरोपीय यूनियन की नौसेनाओं के बीच परस्पर सहयोग को और गहरा करने और एक दूसरे की गतिविधियों से अवगत होने के लिये पिछले हफ्ते यूरोपीय यूनियन के नौसैनिक बलों के पोतों ने मुम्बई स्थित भारतीय नौसेना के अड्डे का दौरा किया और पश्चिमी नौसैनिक कमांड के आला अधिकारियों के साथ समुद्री कार्रवाई के विभिन्न पहलुओं पर गहन बातचीत की।





27 य़ूरोपीय देशों के संगठऩ यूरोपियन यूनियन के आला सैन्य अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों के साथ बैठक कर हिंद महासागर में यूरोपीय यूनियन की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मुम्बई का दौरा करने वाला यूरोपीय सैन्य दल फ्रांस के विध्वंसक पोत कैसार्ड पर आया था। भारत और फ्रांस के बीच दिवपक्षीय स्तर पर समुद्री सुरक्षा के मसले पर सहयोग पहले से ही चल रहा है। यूरोपीय संघ का नौसैनिक दस्ता यूरोपीय नेवफौर आपरेशन अटलांटा के तहत 2008 से ही हिंद महासागर में तैनात है।

यह दल सोमालिया के समुद्री डाकुओं से मुकाबला के लिये अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत तैनात है। इस सहयोग के जरिये यूरोपीय संघ की नौसेना अदन की खाड़ी और सोमालिया के बेसिन में व्यापारिक समुद्री पोतों को सुरक्षा प्रदान किया जाता है। ईयूनेवफार संयुक्त राष्ट्र खाद्य कार्यक्रम के तहत खाद्य सामग्री ले जाने वाले पोतों को भी सुरक्षा प्रदान करता है। इसके तहत सोमालिया के गृहयुद्ध से प्रभावित लोगों को खाद्य सहायता प्रदान किया जाता है। भारत और यूरोप के बीच चल रहे परस्पर सहयोग गत 24-25 दिसम्बर को भारतीय युद्धपोतों ने भी संयुक्त राष्ट्र के खाद्य सामग्री से भरे पोतों को सुरक्षा प्रदान की थी।

समुद्री डाकुओं के खिलाफ चल रहे सहयोग के तहत यूरोपीय यूनिय़ऩ के ईयू मिलीट्री ऑपरेशन के डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशंस मेजर जनरल डेनियल ग्रामिटिको ने नई दिल्ली और मुम्बई में आला रक्षा और नौसैनिक अधिकारियों के साथ बैठकें की थीं। यूरोपीय यूनियन की भारत रणनीति के तहत समुद्री सुरक्षा को और गहरा करने के मसले पर यूरोपीय सैन्य अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों से चर्चा की।

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