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स्पेशल रिपोर्ट: तनातनी के बीच आपसी भरोसे को मजबूत करेंगे भारत और चीन

चीन के राष्ट्रपति के साथ पीएम मोदी
पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। भारत और चीन आपसी भरोसा बढ़ाने के इरादे से रक्षा आदान-प्रदान में और बढ़ोतरी करने पर सहमत हो गए हैं। दोनों देशों के बीच नौंवी रक्षा सलाह मशविरा बैठक 14 नवम्बर को पेइचिंग में हुई जिसमें दोनों पक्षों ने आपसी भरोसा बढ़ाने के इरादे से विश्वास पैदा करने वाले कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई है।





दोनों देशों के बीच रक्षा सचिव स्तर की वार्ता के लिये रक्षा सचिव संजय मित्रा पेइचिंग गए थे। चीन की ओर से बातचीत की अगुवाई चीन के केन्द्रीय सैनिक आयोग के ज्वांइट स्टाफ डिपार्टमेंट के डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल शाओ य्वानमिंग ने अगुवाई की।

गौरतलब है गत 18 जुलाई को ही दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा वार्ता पेइचिंग में हुई थी जिसमें दोनों पक्षों ने एक दूसरे के समुद्री इलाकों में आपसी सहयोग और सौहार्द बनाए रखने पर सहमति दी थी। उ्ल्लेखनीय है कि हिंद महागासर में चीनी नौसेना की बढ़ती गतिविधियों पर भारत के सामरिक हलकों में चिंता जाहिर की जाती है। दक्षिण चीन सागर में भी चीन के प्रभुत्ववादी रवैये से भारत चिंतित है।

रक्षा सचिव वार्ता में दोनों देशों ने सीमा पर शांति व स्थिरता बनए रखने के उपायों को औऱ पुख्ता करने के मसलों पर भी बात की। पिछले अप्रैल महीने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चीन में वूहान शहर में राष्ट्रपति शी चिन फिंग के साथ हुई बैठक के बाद दोनों देश आपसी सद्भाव बढ़ाने वाले कई कदम उठा रहे है।

समझा जाता है कि नवीनतम वार्ता के दौरान दोनों देशों के सैन्य मुख्यालयो में हॉट लाइन स्थापित करने के पुराने प्रस्ताव को लागू करने पर बात हुई है। इस बैठक में भारत ने पाकिस्तानी आतंकवादी मसूद अजहर के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंद लगाने का मसला उठाया है। चीन ने इस प्रस्ताव को रोका हुआ है जो भारत औऱ चीन के रिश्तों में एक बड़ा मसला बना हुआ है।

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