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स्पेशल रिपोर्टः भारत और चीन दे रहे हैं अफगानिस्तान के राजनयिकों को प्रशिक्षण

अफगानिस्तान के राजनयिक

नई दिल्ली। चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मामलों के मंत्री चाओ खची 22 अक्टूबर को भारत दौरे पर आएंगे जबकि चीन के विदेश मंत्री वांग ई का दिसम्बर में भारत दौरे का कार्यक्रम है। इसके अलावा चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक नवम्बर में अर्जेन्टीना में जी- 20 शिखर बैठक के दौरान मुलाकात तय की गई है। चीन के राजदूत ल्वो चाओ हुई ने यहां अफगानिस्तान के राजनयिकों के साझा प्रशिक्षण का कार्यक्रम शुरू करने के मौके पर यह जानकारी दी।





भारत और चीन द्वारा अफगानिस्तान के राजनयिकों को साझा प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम यहां शुरू होने के  मौके पर चीन ने कहा है कि अफगानिस्तान में शांति व स्थिरता बनाए रखने में भारत के साझा हित हैं और दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ हैं। दोनों देश मानते हैं कि अफगानिस्तान में शांति व स्थिरता जल्द बहाल होनी चाहिये। यह साझा कार्यक्रम शुरू होने के मौके पर भारत, चीन और अफगानिस्तान के विदेश मत्रियों ने बधाई और शुभकामनाएं दीं।

यहां 15 अक्टूबर को शुरू हुए कार्यक्रम के मौके पर चीन के राजदूत ल्वो चाओ हुई ने चीन के विदेश मंत्री वांग ई का संदेश पढ़ा। अपने संदेश में चीनी राजदूत ने कहा कि गत अप्रैल माह में वूहान में भारत चीन शिखर बैठक के दौरान अफगानिस्तान में शांति में साझा कार्य्रक्रम शुरू करने पर सहमति बनी थी।   भारत में ट्रेनिंग लेने के बाद अफगानिस्तान के राजनयिकों की ट्रेनिंग चीन में होगी।

चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन के बीच अफगानिस्तान को लेकर जो साझा सहयोग शुरू हुआ है वह अन्य देशों जैसे नेपाल, भूटान, मालदीव, ईरान और म्यांमार में भी चलाया जाना चाहिये। क्षेत्रीय स्थिरता, शांति और समृद्धि के विकास के लिये भारत और चीन सार्क, बिम्सटेक और बीसीआईेएम के तहत भी आपसी सहयोग के कार्यक्रम चला सकते हैं।

वांग ई ने उम्मीद जाहिर की कि इस साझा ट्रेनिंग के जरिये अफगानिस्तान के राजनयिक भारत और चीन को बेहतर समझ सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और चीन ने अफगानिस्तान को अपने प्राथमिकता वाले साझेदार के तौर पर पहचान की है। चीन और भारत अफगानिस्तान में शांति व विकास के सक्रिय समर्थक रहे हैं।

चीनी राजदूत ने उम्मीद जाहिर की कि आने वाले वर्षों में भारत और चीन अफगानिस्तान के लिये कुछ ठोस कार्यक्रम चला सकेंगे। इससे पता चलता है कि क्षेत्रीय मामलों में भारत और चीन सहयोगी भूमिका निभा रहे हैं।

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