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स्पेशल रिपोर्ट: भारत ने फिर कहा- रूसी एस 400 मिसाइल सौदा हो कर रहेगा

एस- 400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम
एस 400 मिसाइल (सौजन्य- गूगल)

नई दिल्ली। रूस से एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली सौदा पर अंतिम दौर की बातचीत के रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान के बाद अब मास्को में भारत के राजदूत पंकज सरन ने कहा है कि भारत इस सौदे पर कायम रहेगा।





रूस की तास समाचार एजेंसी के साथ इंटरव्यू में पंकज सरन ने कहा कि रूस के साथ एस-400 सहित सभी रक्षा सौदों को सम्पन्न करने के लिये हम प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि पंकज सरन को भारत का उपराष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया है।

डिपुटी एनएसए का दायित्व सम्भालने के पहले रूस में भारत के निर्वतमान राजदूत ने कहा कि पिछले महीने रूस के सोची शहर में राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अनौपचारिक शिखर बैठक के दौरान भारत औऱ रूस के बीच सैन्य तकनीकी सहयोग के हर पहलू पर चर्चा की गई। एक दूसरे पर भरोसा और आपसी लाभ के लिये भारत औऱ रूस के बीच सैन्य तकनीकी सहयोग का एक लम्बा इतिहास रहा है। इस क्षेत्र मे साझेदारी को लेकर भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह पूछे जाने पर कि क्या इस साल ब्लादीमिर पुतिन औऱ प्रधानमंत्री मोदी की होने वाली औपचारिक शिखर बैठक के दौरान एस-400 मिसाइल सौदे पर दस्तखत होने की उम्मीद है पंकज सरन ने कहा कि वह कोई समय नहीं तय करना चाहेंगे लेकिन इतना जरूर कहेंगे कि एस-400 को लेकर चल रही सौदेबाजी में अहम प्रगति हुई है। गौरतलब है कि भारत और रूस के बीच होने वाली सालाना शिखर बैठक आगामी अक्तूबर में नई दिल्ली में होने वाली है।

रूस से एस-400 मिसाइल का सौदा सम्पन्न करने पर सहमति दो साल पहले गोवा में ब्रिक्स शिखर बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई बैठक में हुई थी। बाद में दोनों देशों ने तय किया कि भारत के महानगरों की दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों से रक्षा के लिये पांच एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली खऱीदी जाएंगी जिस पर करीब पौने छह अरब डालर की लागत आएगी।

एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली सैंकड़ों किलोमीटर दूर से ही आसमान में दुश्मन की हमलावर बैलिस्टिक मिसाइल को नष्ट करने की क्षमता रखती है। भारत के प़ड़ोस में पाकिस्तान औऱ चीन द्वारा भारत के विभिन्न शहरों और प्रमुख ठिकानों को निशाना बना कर तैनात बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के लिये एस-400 मिसाइलों की तैनाती को जरूरी माना जा रहा है।

गौर तलब है कि अमेरिका ने एक प्रतिबंध कानून काउंटरिग अमेरिकन एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट ( कैटसा) पारित किया है जिसके तहत रूस के 37 रक्षा प्रतिष्ठानों पर पाबंदी लगाई गई है। इस कानून के पारित होने के बाद अमेरिकी प्रशासन के आला अधिकारियों ने भारत को चेतावनी दी है कि वह रूस से एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली को नहीं खरीदे। लेकिन भारत में विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों औऱ नेताओं ने साफ किया है कि वह अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंध कानून को नहीं मानता। भारत केवल संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित प्रतिबंधों का ही सम्मान करेगा।

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