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स्पेशल रिपोर्ट: सीजफायर का आदर लेकिन सेना चौकस रहेगी

भारतीय सेना

नई दिल्ली। रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत पर एक बड़ी पहल करते हुए भारत सरकार ने सीजफायर का ऐलान कर सब को चकित कर दिया। आतंकवादियों का डटकर मुकाबला कर रहे सेना और अन्य सुरक्षा बलों के आला अधिकारियों ने कहा है कि सीजफायर का वे सख्ती से पालन करेंगे। सरकार ने उन्हें छूट दी है कि यदि उन पर कोई आतंकवादी हमला होता है तो वे उनका पूरी ताकत के साथ जवाब और आत्मरक्षा में जरूरी कदम उठाने के लिये पूरी तरह स्वतंत्र हैं।





यहां सैन्य सूत्रों का कहना है कि सीजफायर के दौरान वे कार्डन एवं सर्च ऑपरेशन यानी घेर कर खोजी अभियान नहीं चलाएंगे। इसके अलावा वे सर्च एवं डिस्ट्राय ऑपरेशन यानी खोजी और तबाह करने की कार्रवाई भी नहीं करेंगे। लेकिन इस दौरान वे पूरी मुस्तैदी से तैनात रहेंगे और अपनी छावनियों की पूरी चौकसी करेंगे और किसी भी आतंकवादी हमले से निबटने के लिये तैयार रहेंगे।

गौरतलब है कि सन 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री काल में भी रमजान के मौके पर सीजफायर घोषित किया गया था जिस दौरान आतंकवादियों ने कई बड़े आतंकवादी हमले किये थे जिसमें श्रीनगर हवाई अडडे  पर हमला शामिल था। यहां सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि 18 साल पहले हुए सीजफायर आपरेशन के दौरान हुई चूक की समीक्षा करेंगे और इस बार जरूरी एहतियाती कदम उठाएंगे।

सीजफायर करने की मांग जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक वर्ग से जोरशोर से की गई थी। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सर्वदलीय बैठक कर इसकी मांग दुहराई थी लेकिन केन्द्र सरकार औऱ सत्तारूढ़ एनडीए सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था। जहां थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सीजफायर को लेकर अपनी चिंता  जाहिर की थी वहीं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी सीजफायर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

सरकारी हलकों में इस बात की चिंता है कि जम्मू कश्मीर में जो आतंकवादी सक्रिय हैं उनके आका सीमापार बैठे हुए हैं और उनकी डोर रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय से बंधी है। आतंकवादी तत्वों की कमान रावलपिंडी में सैन्य जनरलों के हाथ में है, इसलिये यहां रक्षा हलकों में माना जा रहा है कि आतंकवादी तत्व सीजफायर का लाभ उठाकर एकजुट होने की कोशिश करेंगे और अपने को नये सिरे से ताकतवर बनाएंगे।

लेकिन यहां सरकारी सूत्रों का कहना है कि आतंकवादी तंजीमों के सामने भारत सरकार ने एक सुनहरा मौका दिया है। यदि इसका सम्मान वे नहीं करते हैं तो आगे उनके खिलाफ सुरक्षा बल काफी सघन अभियान चलाएंगे। अलगाववादी हुरियत संगठन के नेता यदि भारत सरकार की इस एकपक्षीय सीजफायर पेशकश को नहीं मानते हैं तो उन्हें भविष्य में इसका खामियाजा भुगतना होगा।

 

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