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चीन के युननान प्रांत से स्पेशल रिपोर्टः सदियों पुराना भारत-चीन सम्पर्क बहाल करने की कोशिश

भगवान बुद्ध की महिला आकृति वाली मूर्ती

ताली ( युननान)। सदियों पहले कभी भारतीय बौद्ध भिक्षु चीन के अन्य राज्यों सहित युननान प्रांत का भी भ्रमण करते थे और बौद्ध दर्शन और ज्ञान का संचार कर स्थानीय लोगों के साथ भारत का रिश्ता बनाते थे। यहां की मनोरम पहाड़ियां औऱ घाटियां बौद्ध भिक्षुओं की पदछाप से अटी पड़ी है। यूननान प्रांत की पहाड़ी गुफाओं और चट्टानों पर तराशी गई बुद्ध की मूर्तियां भारत के असीम प्रभाव की कहानी खुद ही कहती हैं। आज भी चीन का यह युननान प्रांत भारतीयों को बुला रहा है- ज्ञान लेने नहीं बल्कि ज्ञान देने और पर्यटन के जरिये मनोरंजन करवाने।





युननान प्रांत का पहाड़ी शहर ताली एक वक्त में भारतीय और चीनी व्यापारियों के बीच व्यापारिक आदान-प्रदान का दक्षिणी रेशम मार्ग बन गया। आज 21 वीं सदी में ताली का भ्रमण एक ही बात की ओर ध्यान आकर्षित करता है कि भारत और चीन के लोगों के बीच दो हजार साल से गहरा सम्पर्क औऱ आदान-प्रदान रहा है जिसे फिर से बहाल करने की कोशिश आधुनिक युग में हो रही है। यदि यह कहा जाए कि यह आदान-प्रदान अधिकतर एकपक्षीय यानी भारत से चीन की ओर ही रहा है तो अतिशयोक्ति नहीं होगा। इस इलाके में आठवीं औऱ नौंवी शताब्दि के दौरान बनी बौद्ध मूर्तियों और बौद्ध मंदिर परिसर -तीन पैगोडा- का दर्शन एक अनोखा अनुभव देता है जो उसी क्षण भारत और चीन के बीच सदियों से जनता स्तर पर चले आ रहे सम्पर्क की भावनात्मक कहानी कहता है।

भगवान बुद्ध की मूर्ति

9वीं शताब्दि में भगवान बुद्ध की महिला आकृति वाली दुर्लभ मूर्ति

तब भारतीय बौद्ध भिक्षु चीन के इस इलाके में आ कर बौद्ध दर्शन का ज्ञान देते थे लेकिन आज दो हजार साल बाद भी भारतीय लोग युननान आ रहे हैं पर इस बार वे भारत का ज्ञान देने नहीं बल्कि चीन से ज्ञान हासिल करने आते हैं। आम भारतीय लोगों को चीन के युननान प्रांत के ताली शहर का पता नहीं होगा लेकिन छात्र समुदाय जरूर चीन के इस अज्ञात इलाके में मिल रही आधुनिक शिक्षा से अवगत हैं औऱ वे ताली में आधुनिक शिक्षा ग्रहण करने आ रहे हैं। यहां का ताली विश्वविद्यालय मेडिकल शिक्षा के लिये भारतीय छात्रों में लोकप्रिय होता जा रहा है। यहां के मेडिकल कालेजों में इस बार पांच सौ से अधिक भारतीय छात्र भर्ती हुए हैं और वे यहां के रहन-सहन आदि से काफी प्रभावित हैं भले ही उन्हें यहां का भोजन पसंद नहीं आता है।

ताली विश्वविद्यालय में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे एक भारतीय छात्र मनोज कुमार कहते हैं कि हालांकि यहां की ताली संस्कृति काफी भिन्न है लेकिन उन्हें यहां अपने को एडजस्ट करने में दिक्कत नहीं हुई।  यहां पढ़ाई करने वाले कई छात्र यूरोप और दूसरे इलाकों में मेडिकल की प्रैक्टिस करते हैं औऱ भारतीय मेडिकल काउंसिल (एमसीआई) की परीक्षा में ताली में पढ़े 80 प्रतिशत से अधिक छात्र पास हो जाते हैं जो इस बात का प्रमाण है कि ताली के मेडिकल कालेजों में उच्च स्तर की पढ़ाई होती है। भारत में प्राइवेट मेडिकल कालेजों में भर्ती के लिये लगने वाले लाखों रुपये की तुलना में ताली के मेडिकल कालेजों की पढाई न केवल काफी सस्ती है बल्कि बेहतर भी है।

आज दोनों देशों के बीच व्यापार हो रहा है लेकिन इस रेशम मार्ग के जरिये नहीं। अड़हाई झील और छांगशान पर्वतों के लिये प्रसिद्ध इस इलाके में आज भारत से हजारों पर्यटक यहां आने लगे हैं जिनकी यहां की युननान सरकार को काफी दरकार है। युननान प्रांत के अधिकारी भारत से अपने प्राचीन रिश्ते बहाल करने को उत्सुक हैं और इसके लिये न केवल अपने शिष्टमंडलों को भारत भेज रहे हैं बल्कि भारत से भी लोगों को आमंत्रित कर रहे हैं।

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