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स्पेशल रिपोर्ट: F-16 भारत में बनाकर निर्यात भी करेंगे- डॉ. विवेक लाल

डॉ. विवेक लाल

नई दिल्ली। अमेरिकी रक्षा वैमानिकी कम्पनी लॉकहीड मार्टिन ने भारतीय वायुसेना के लिये 110 लड़ाकू विमानों की होड़ में अपने को शामिल किया है औऱ भारतीय वायुसेना के सूचना के लिये आग्रह (RFI) के जवाब में एफ-16 लड़ाकू विमानों की पेशकश के विभिन्न प्रस्तावों का 650 पेजों का दस्तावेज रक्षा मंत्रालय को सौंप दिया है।





लॉकहीड मार्टिन के वाइस प्रेजिडेंट डॉ. विवेक लाल ने यहां रक्षक न्यूज से विशेष बातचीत में बताया कि भारतीय वायुसेना यदि एफ-16 ल़डाकू विमान का चयन करती है तो भारत में इसे बनाने का बड़ा कारखाना लगाया जाएगा औऱ भारत से ही दूसरे देशों को निर्यात भी किया जाएगा। फिलहाल एफ- 16 विमानों का 28 देशों में इस्तेमाल किया जाता है जहां इसके विभिन्न कलपुर्जों औऱ हिस्सों के सप्लाई का 165 अरब डॉलर का विशाल बाजार भारत में स्थापित होने वाली संयुक्त उद्यम कम्पनी को उपलब्ध होगा। एफ-16 का भारत सरकार की सामरिक साझेदारी के तहत भारत में ही उत्पादन भारतीय कम्पनी के सहयोग से होगा।

डॉ. लाल ने दावा किया कि एफ-16 विमान हालांकि एक इंजन वाला है लेकिन यह दो इंजन वाले विमानों की तुलना में अधिक मारक दूरी तक जाएगा और इसकी लागत भी दूसरे प्रतिस्पर्द्धी विमानों की तुलना में 30 प्रतिशत कम होगी। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना के लिये 110 लड़ाकू विमानों का आरएफआई पिछले साल के मध्य में जारी किया गया था। इसके बाद फिर उन्हीं देशों की लड़ाकू विमान कम्पनियों ने इस होड़ में भाग लेने का फैसला लिया है जो पिछली बार 126 विमानों की होड़ में थे। ये कम्पनियां हैं अमेरिकी बोईंग के एफ- 18 और लॉकहीड मार्टिन के एफ- 16, स्वीडन की साब कम्पनी के ग्रिपेन, रूसी मिग- 35, फ्रांस के राफेल औऱ चार यूरोपीय देशों के यूरोपियन फाइटर।

डॉ. लाल ने बताया कि एफ- 16 ब्लॉक- 70 किस्म की जो सबसे नई किस्म के विमान की पेशकश इस बार भारत को की गई है उसमें अमेरिकी 5वीं पीढ़ी के ल़ड़ाकू विमानों एफ- 35 और एफ- 22 के नवीनतम उपकरण लगाए गए हैं जिससे एफ- 16 की मारक क्षमता कुछ मायनों में इन पांचवीं पीढ़ी के लडाकू विमानों के समकक्ष हो सकती है।

डॉ. लाल ने बताया कि एफ-16 के अब तक 4,588 विमानों का उत्पादन हो चुका है जिसमें से 3,000 विभिन्न देशों में सेवारत हैं। इसलिये भारत में यदि एफ- 16 की नई प्रोडक्शन लाइन लगाई जाती है तो यह इन सभी देशों के लडाकू विमानों की मेनटेनेंस जरूरतों को पुरा कर सकेगी।

डॉ. लाल ने उम्मीद जाहिर की कि भारतीय वायुसेना को करीब 200 लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी औऱ इतने ही विमानों के ऑर्डर लॉकहीड मार्टिन को मिलने की उम्मीद है इसलिये इन सबका निर्माण भारत में हो सकता है। फिलहाल टाटा के साथ मिलकर हैदराबाद में एफ- 16 के कुछ हिससे बनाए जा रहे हैं। इस कारखाने में एक हजार से अधिक भारतीय स्टाफ कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि लॉकहीड मार्टिन की योजना है कि एफ- 16 के ग्लोबल सप्लाई चेन का मुख्य श्रोत भारत को बनाया जाए।

डॉ. लाल ने कहा कि एफ- 16 की ब्लॉक- 70 किस्म नवीनतम विमान है जिसमें पिछली बार की गई पेशकश की तुलना में कई नई खासियतें जोड़ी गई हैं। इससे एफ- 16 की नवीनतम किस्म काफी संहारक हो जाएगी।

हालांकि एफ- 16 एक इंजन वाला विमान है और इसकी तुलना में बोईग के एफ- 18 और यूरोपियन फाइटर दो इंजन वाले हैं लेकिन एफ-16 को इन दो इंजन वाले विमानों से अधिक चुस्त औऱ फुर्तीला बनाया गया है। नवीनतम किस्म के ब्लॉक- 70 की उड़ान अवधि 12 हजार घंटे की होगी। पहले की किस्म की उड़ान अवधि केवल 8 हजार घंटे ही थी। वास्तव में अन्य सभी प्रतिस्पर्द्धी विमानों की उड़ान अवधि भी 8 हजार घंटे की ही है।

नवीनतम एफ- 16 विमान में वैसा ही आएसा रेडार (AESA) लगाया गया है जैसा कि एफ- 35 और एफ- 22 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में लगे हैं।

डॉ. लाल ने बताया कि भारतीय वायुसेना से आर्डर मिलने के बाद भारत में इनका उत्पादन करने में पांच साल का वक्त लगेगा। यहां रक्षा सूत्रों में माना जा रहा है कि आगामी मई में नई सरकार के गठन के बाद ही भारतीय वायुसेना के 110 लड़ाकू विमानों की खरीद की प्रक्रिया तेजी पकड़ेगी।

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