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Special Report: रवांडा के साथ गाय की कूटनीति

रवांडा में पीएम मोदी

नई दिल्ली। अफ्रीकी देश रवांडा के साथ पिछले साल आपसी रिश्तों को सामरिक रंग देने के बाद अब भारत ने वहां गाय की कूटनीति शुरू की है। रवांडा के अपने पहले दौरे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रवांडा के दो सौ गरीब परिवारों को गायें भेंट में दी।





गरीब लोगों के लिये रवांडा सरकार ने अपने गिरिनका कार्यक्रम के तहत पहले से ही गाय देने का  कार्यक्रम चलाया हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी कार्यक्रम में अपना योगदान दे कर वहां की सरकार औऱ लोगों का दिल जीता है। रवांडा सरकार का गिरिनका कार्यक्रम 2006 में शुरू किया गया था और 2016 तक करीब अढाई लाख गायें भेंट की जा चुकी थीं।

रवांडा सरकार का लक्ष्य है कि इस कार्यक्रम के जरिये रवांडा में बाल कुपोषण को दूर किया जाए। रवांडा में अपनी गायों से पैदा हुए बछडों को पड़ोस के परिवार को भेंट में देने की परम्परा है। रवांडा सरकार ने इस तरह पिछड़े गांवों के गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने की यह पहल की है जो काफी कामयाब हो रही है। इसी से प्रोत्साहित हो कर भारत ने भी रवांडा से ही 200 गायें खरीद कर रवांडा के डेयरी किसानों को भेंट में दी है। गिरिनका शब्द का मतलब होता है भगवान आपको गाय दे। यह रवांडा की सदियों पुरानी परम्परा है।

गिरिनका कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली गायों से न केवल परिवार के लोग दूध पी कर अपना कुपोषण दूर कर सकेंगे। इससे वहां के खेतों को भी खाद मिलेगी औऱ घरों में जलावन के लिये गोबर के उपलें मिल भी सकेंगे।

गायें भेंट करने के लिये आय़ोजित एक कार्यक्रम के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पाल कगामे की गाय भेंट कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकर हैरानी हुई है कि रवांडा में आर्थिक बेहतरी के लिये किस तरह गायों को महत्व दिया जा रहा है। मोदी ने कहा कि भारत औऱ रवांडा के ग्रामीण जीवन में काफी समानता है। गिरिनका कार्यक्रम से गांवों की अर्थव्यवस्था में भारी बदलाव आएगा।

यहां राजनियक सूत्रों ने बताया कि ये गायें रवांडा से खरीद कर गरीब लोगों को बांटी गई। गायों से रवांडा के आम जनजीवन पर भारी अनुकूल असर होगा। इस वजह से रवांडा के लोग भारत को भी लम्बे अर्से तक के लिये याद रखेंगे।

गायों के अलवा भारत ने रवांडा की कृषि सिंचाई योजना के लिये दस करोड़ डालर और किगाली स्पेशल इकोनोमिक जोन में औद्योगिक पार्क स्थापित करने के लिये भी दस करोड़ रुपये वित्तीय अनुदान दिया। इसके अलावा भारत ने रवांडा के साथ एक व्यापारिक सहयोग समझौता भी किया।

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