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Special Report: आसियान शिखर सम्मेलन में समुद्री कानूनों के पालन पर होगी बात

आसियान शिखर सम्मेलन
आसियान शिखर सम्मेलन (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। सिंगापुर में 14 और 15 नवम्बर को हो रहा आसियान शिखर सम्मेलन भारत के नजरिये से काफी अहम होगा। माना जा रहा है कि इस दौरान भागीदार देश हिंद प्रशांत इलाके में शांति व सुरक्षा बनाए रखने के लिये अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पालन पर जोर देंगे। सिंगापुर शिखर बैठकों में हिंद प्रशांत इलाके को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान की सामरिक हलकों में विशेष प्रतीक्षा रहेगी।





इस दौरान प्रधानमंत्री न केवल भारत –आसियान शिखर बैठक को सम्बोधित करेंगे बल्कि पूर्व एशिया शिखर बैठक को भी सम्बोधित करेंगे। इसके साथ ही आसियान  देशों द्वारा प्रस्तावित आरसीईपी ( रीजनल  कंप्रिहेन्सिव इकोनामिक पार्टनरशिप) समझौता पर चर्चा के लिये आयोजित शिखर बैठक को भी सम्बोधित करेंगे। इसके अलावा सिंगापुर द्वारा आयोजित फिनटेक समिट में भी प्रधानमंत्री मोदी को  प्रमुख भाषण देने के लिये आमंत्रित कर विशेष सम्मान दिया गया है।

यहां विदेश मंत्रालय में सचिव विजय ठाकुर सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के सिंगापुर दौरे की जानकारी देते हुए बताया कि 36 घंटे के सिंगापुर दौरे में प्रधानमंत्री मोदी कई विश्व नेताओं से मिलेंगे जिनमें अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस से मुलाकात शामिल है। गौरतलब है कि इस शिखर बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मौजूद नहीं रहेंगे। आम तौर पर ईस्ट एशिया समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति शिरकत करते हैं।

ईस्ट एशिया समिट के दौरान हिंद प्रशांत इलाके में शांति व सुरक्षा के मसलों पर सभी नेताओं के बोलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक व विस्तारवादी रवैये को देखते हुए ईस्ट एशिया समिट के सदस्य देश शांति व स्थिरता की अहमियत पर जोर देंगे।

प्रधानमंत्री मोदी गत जून माह में ही शांगरीला डायलॉग में मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल होने के लिये सिंगापुर गए थे जहां उन्होंने हिंद प्रशांत इलाके के लिये अपना महत्वपूर्ण भाषण दिया था। सिंगापुर में  प्रधानमंत्री मोदी आसियान के दस सदस्य देशों के प्रमुखों के साथ नाश्ते पर भारत – आसियान शिखर बैठक को सम्बोधित करेंगे। इस साल आसियान के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री की यह दूसरी शिखर बैठक होगी। आसियान के नेता इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर विशेष अतिथि के तौर पर एक साथ मौजूद थे।

ईस्ट एशिया समिट की स्थापना 13  साल पहले हुई थी। तब से भारतीय नेता इस शिखर बैठक को सम्बोधित करते रहे हैं। इसके सदस्यों में अमेरिका, चीन, जापान, आस्ट्रेलिया आदि देश हैं जिनके शिखर नेताओं के साथ शिखर बैठक पर सामरिक हलकों की विशेष निगाह रहती है।

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