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स्पेशल रिपोर्ट: सेना इजराइली स्पाइक मिसाइल नहीं, ‘नाग’ को बनाएगी अपनी ताकत

टैंकरोधी नाग मिसाइल
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारतीय सेना ने इजराइल की रफायल कम्पनी से   स्पाइक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) सौदा रद्द कर दिया है। थलसेना इसके बदले अब स्वदेशी ‘नाग’ मिसाइल को ही हासिल करने पर विचार कर रही है।





यहां विश्वस्त रक्षा सूत्रों ने इन रिपोर्टों की पुष्टि की है कि  भारतीय सैन्य अधिकारियों ने जब पिछले साल इन मिसाइलों का मैदानी परीक्षण किया तो ये कसौटी पर खरी नहीं उतरीं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक स्पाइक मिसाइल में लगे सेंसर लक्ष्य को नहीं खोज सके। ये परीक्षण राजस्थान के पोकरण परीक्षण रेंज में किये गए थे। इन परीक्षणों से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि  ये मिसाइल कई इलाकों में कामयाब नहीं हो सके।

भारतीय थलसेना ने ऐसी 8,356 एंटी टैंक मिसाइलें खरीदने की योजना बनाई थी लेकिन अब थलसेना को ऐसी क्षमता वाली मिसाइलें सौंपने में और देरी होगी। थलसेना ने इन मिसाइलों के लिये 21 लाॉन्चर और 15 सीमूलेटर रफायल से खरीदने की बात की थी।

रक्षा सूत्रों ने कहा कि थलसेना अब देश में ही रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित नाग एंटी टैंक मिसाइल को हासिल करने पर विचार कर रही है। इससे ‘मेक इन इंडिया’ को भी बढ़ावा मिलेगा। नाग एंटी टैंक मिसाइलें किसी जवान द्वारा कंधे पर रख कर छोड़ी जा सकती है।

गौरतलब है कि रक्षा मंत्रालय ने भी बाद में संसद में दिये एक बयान में कहा था कि  देश में ही विकसित तीसरी पीढ़ी की एंटी टैंक मिसाइलों के विकास के मद्देनजर विदेश से तकनीक हस्तांतरण के जरिये मिसाइल हासिल करने की जरुरत नहीं है। डीआरडीओ साल 2009 से ही दागो और भूल जाओ किस्म वाली एंटी टैंक मिसाइल के विकास पर काम कर कर रहा था। डीआरडीओ ने इसके विकास पर 322 करोड़ रुपये खर्च किये हैं।  नाग मिसाइल चार किलोमीटर दूरी तक दुश्मन के टैंक को निशाना बना सकती है। यह दुनिया की सबसे अधिक मारक दूरी वाली मिसाइल बताई जा रही है। नाग मिसाइल का थलसेना ने कई दौर में परीक्षण किया है।

नाग मिसाइल मैकेनाइज्ड इनफैन्ट्री और हवाई मंचों जैसे हमलावर हेलिकॉप्टरों से छोड़ी जा सकती है। इस तरह नाग को जमीन और  आसमान से छोड़ा जा सकता है। यह मिसाइल किसी तेज गति से जा रहे लक्ष्य को भी निशाना बना सकती है।

नाग मिसाइल देश में ही  विकसित इमेज सीकिंग ऑप्टिकल गाइडेंस प्रणाली से लैस है जिससे यह दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों से जैम नहीं की जा सकतीं। इस तरह की प्रणाली अमेरिकी जैवेलिन या इजराइली स्पाइक में नहीं होती हैं।

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