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स्पेशल रिपोर्ट: अंडमान को मिलेगा तीसरा नौसैनिक हवाई अड्डा

आईएनएस कोहासा

नई दिल्ली। अंडमान एवं निकाबोर के इलाके में नौसेना का सामरिक महत्व का तीसरा नौसैनिक हवाई अड्डा आईएनएस कोहासा 24 जनवरी को नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा कमीशन करेंगे। इस नौसैनिक हवाई अड्डे का नाम सफेद पेट वाले सी ईगल पक्षी पर रखा गया है जो अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में पाया जाता है। इस नये नौसैनिक हवाई अड्डे के संचालित होने से अंडमान सागर और हिंद महासागर के सम्पूर्ण इलाके में भारतीय नौसेना की टोही क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी। इस नौसैनिक अड्डा पर पी-8-आई समुद्री टोही विमान उतारा जा सकेगा। इस अड्डे पर बड़े लड़ाकू विमान भी उतर सकेंगे।





गौरतलब है कि हिंद महासागर में चीन की नौसेना की बढ़ती हरकतों पर नजर ऱखने के लिये भारतीय नौसेना अपनी हमलावर औऱ टोही क्षमता में भारी विस्तार कर रही है।

आईएऩएस कोहासा अब तक नेवल एयर स्टेशन शिवपुर के तौर पर काम कर रहा था। इसे और आधुनिक बनाने औऱ इसकी ढांचागत क्षमताएं बढ़ाने के बाद इसे आईएनएस कोहासा नौसैनिक वायुअड्डा में बदला गया। नेवल एयर स्टेशन शिवपुर उत्तरी अंडमान में टोही भूमिका के लिये फारवर्ड आपरेटिंग बेस के तौर पर 2001 में स्थापित हुआ था। यह द्वीप अंडमान द्वीपों के सुदूर उत्तरी इलाके में है। यह नौसैनिक अड्डा न केवल अंडमान द्वीपों की सुरक्षा के नजरिये से सामरिक अहमियत का है बल्कि इस इलाके के सम्पूर्ण विकास में भी योगदान देगा। इस नये वायुसैनिक अड्डा के बन जाने से अंडमान एवं निकोबार द्वीप के इलाके में अंडमान एवं निकोबार कमांड स्वतंत्र तौर पर काम करने की क्षमता हासिल करेगा जिससे इसकी रक्षात्मक और टोही व प्रहारक क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी।

आईएऩएस कोहासा के पहले अंडमान इलाके में दो नौसैनिक हवाई अड्डे पोर्ट् ब्लेयर पर ‘आईएनएस उत्क्रोष’ और कैम्पबेल बे पर ‘आईएनएस बाज’ सक्रिय हैं।

फिलहाल इस नौसैनिक हवाई अड्डे से नौसेना, वायुसेना और कोस्ट गार्ड के छोटे विमान उड़ान भर रहे थे जिसकी हवाई पट्टी एक हजार मीटर लम्बी है। इसके विस्तार के दूसरे चरण में हवाई पट्टी की लम्बाई तीन हजार मीटर की कर दी जाएगी। इससे हवाई अड्डे पर चौड़े आकार वाले विमानों को उतारने की सुविधा हासिल हो जाएगी। इसके सक्रिय होने के बाद यह हवाई अड्डा सैनिक और नागरिक विमानों के लिये भी समान तौर पर उपलब्ध होगा। इस पर नागरिक विमानन मंत्रालय की उड़ान योजना के तहत नागरिक विमानों को उतारने की सुविधा विकसित की गई है।

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