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स्पेशल रिपोर्टः वायुसेना का तीनों सेनाओं के बीच साझा ट्रेनिंग पर जोर

डॉ. सुभाष भामरे

नई दिल्ली।  भारतीय वायुसेना में निकट भविष्य में राफेल और तेजस लड़ाकू विमानों, चिनूक और अपाशे हेलीकाप्टरों और स्पाइडर औऱ मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें शामिल होंगी जिनके संचालन के लिये भारतीय वायुसैनिकों को जरूरी ट्रेनिंग मुहैया कराने के कार्यक्रम पर यहां 11 अक्टूबर से शुरु हुए कमांडर सम्मेलन में चर्चा  हुई ।





साल में दो बार होने वाले कमांडर सम्मेलन का उद्घाटन रक्षा राज्य मंत्री डा. सुभाष भामरे ने किया। इस सम्मेलन में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा कि वायुसैनिकों को जल्द ही शामिल होने वाले नये विमानों , हेलीकाप्टरों और मिसाइलों के  संचालन की ट्रेनिंग की रुपरेखा तैयार होगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने के लिये तीनों सेनाओं के बीच तालमेल विकसित करने और  साझा ट्रेनिंग की जरुरत पर भी वायुसेना प्रमुख ने जोर दिया।

दो दिनों का वायुसेना कमांडरों का यह सम्मेलन वायुसेना के मुख्यालय वायु भवन में शुरु हुआ। इसमें वायुसेना के आला कमांडर और अधिकारी भाग ले रहे हैं जो वायुसेना के विभिन्न प्रशासनिक, समाघात औऱ मेनटेनेंस मसलों पर चर्चा करेंगे।

अपने सम्बोधन में वायुसेना प्रमुख ने  वायुसेना की समाघात क्षमता बनाए रखने के लिये वायुसैनिकों की ट्रेनिंग जरूरतों के बारे में कहा कि हमें अपनी प्रतिद्वंद्वी ताकतों से बेहतर धार बनाए रखनी है। रक्षा राज्य  मंत्री भामरे ने कमांडरों के सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि  भारतीय वायुसेना हिंद महासागर के इलाके में समग्र सुरक्षा प्रदाता की भूमिका निभा रही है। इससे समुद्र में सिक्युरिटी एंड ग्रोथ फार आल  इन द रीजेन ( सागर ) की  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की  नीति को बढ़ावा मिल रहा है।  भारतीय वायुसेना में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिये भी उन्होंने वायुसेना के कमांडरों की सराहना की।  उन्होंने वायुसेना   द्वारा  स्वदेशी तेजस लड़़ाकू विमान के 18  स्क्वाड्रन हासिल करने की प्रतिबद्धता की सराहना की।

उन्होंने वायुसेना की इस बात के लिये भी सराहना की कि वायुसेना बायोजेट ईंधन के कार्य्रक्रम को बढ़ावा दे रही है जिससे न केवल वायुसेना का आयात बिल करीब दस प्रतिशत घटेगा बल्कि इससे किसानों की भी आय बढ़ेगी।

 डा. भामरे ने कहा कि मेहर बाबा स्वार्म ड्रोन प्रतियोगिता काफी उत्साहजनक है जिससे मानवरहित वैमानिकी प्रणालियों की नई तकनीक का पता लगाने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वायुसेना पहली सेना है जिसने आर्टीफिशियल प्रणाली के विकास का काम प्राइवेट सेक्टर के सहयोग से शुरु किया है।  उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में जो कामयाबी मिली है वह काफी उत्साहवर्द्धक है।

कमांडर सम्मेलन में वैमानिकी कम्पनी हिंदुस्तान एरोनाटिक्स लि. के आला अधिकारी भी भाग ले रहे हैं जिनके साथ वायुसेना के विमानों और अन्य प्रणालियों की मेनटेनेंस, उत्पादन और विकास के कार्यक्रमों पर चर्चा की जाएगी।

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