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स्पेशल रिपोर्ट: वायुसेना को चाहिए अवाक्स विमान, क्या रूस से हो पायेगा सौदा?

अवाक्स टोही विमान

नई दिल्ली।  भारतीय वायुसेना के लिये दो और अवाक्स टोही विमान मुहैया कराए जाएंगे जो रूसी आईएल-78 परिवहन विमानों पर आधारित होंगे। इन दो विमानों के सौदे पर पिछले साल से बातचीत चल रही है लेकिन एस-400 एंटी मिसाइल के सौदे पर अमेरिका द्वारा एतराज जताए जाने के बाद अब सामरिक हलकों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या भारत इन दोनों रूसी विमानों का सौदा रूस से कर पाएगा।





गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना को तीन अवाक्स विमान पिछले दशक के मध्य में मुहैया कराए गए थे। इनके लिये भी तीन आईएल-78 विमान रूस से हासिल कर उन पर इजराइली रेडार औऱ एवियानिक्स प्रणाली तैनात की गई थी। तब भारतीय वायुसेना ने ऐसे दो और अवाक्स विमान हासिल करने का विकल्प छोड़ा था। भारतीय वायुसेना के समक्ष बढ़ती चुनौतियों के बीच अब दो और अवाक्स विमान हासिल करने का फैसला किया गया जिसके लिये फिर भारत, इजराइल और रूस के बीच त्रिपक्षीय  सहयोग होगा।

रूसी शस्त्र निर्यात एजेंसी रोजोबोरोनएक्सपोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक दोनों आईएल-78 परिवहन विमानों को हासिल करने के लिये सौदेबाजी अंतिम दौर में चल रही है। अधिकारी के मुताबिक आईएल-78 के अलावा भारत और रूस के बीच दो अरब डालर के चार फ्रिगेट, एक अरब डालर के 200 कामोव टी-226 हेलीकाप्टर और भारत में साढ़े छह लाख कलाशिनकोव एके-103 राइफलों के सौदे पर भी बातचीत अंतिम दौर की हो चुकी है। इन राइफलों का भारत में ही उत्पादन होगा। इसके अलावा आईएल-76 परिवहन विमानों को उन्नत बनाने का 60 करोड़ डालर का सौदा भी लागू होना है।

एस-400 एंटी मिसाइल प्रणालियों का 5.43 अरब डालर का सौदा भारत और रूस के बीच अब तक का सबसे बड़ा एकल सौदा बताया जा रहा है जिस पर अमेरिका ने कैटसा कानून के तहत प्रतिबंध लगाने की अप्रत्यक्ष धमकी दी है। यहां सामरिक हलकों में इस बात की शंका जाहिर की जा रही है कि एस-400 मिसाइलों के सौदे पर यदि अमेरिका प्रतिबंध की छूट दे भी दे तो भविष्य के सौदों को अमेरिकी कैटसा प्रतिबंधों से छूट दिलाना मुश्किल होगा।

 

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