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स्पेशल रिपोर्ट: पीठ में 2 छड़े लगी हैं लेकिन अब भी सागरों की ओर लौटना चाहते हैं कमांडर टोमी

कमांडर अभिलाष टोमी

नई दिल्ली। पृथ्वी की सागरीय परिक्रमा के लिये आयोजित गोल्डन ग्लोब रेस में भाग ले रहे नौसेना के कमांडर अभिलाष टोमी कुछ महीनों बाद ही सितम्बर में समुद्री बवंडर में ऐसे घायल हुए कि उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई। लेकिन इसके बावजूद उनका कहना है कि वह समुद्र से नहीं डरते। वह पूरी तरह ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि 2022 में होने वाली ऐसी ही प्रतियोगिता में फिर भारत का नाम रौशन करेंगे।





नौसेना के टोही विमानों के पायलट कमांडर टोमी ने यहां एक बातचीत में कहा कि वह समंदर में फिर लौटना चाहते हैं। पिछले साल 21 जुलाई को फ्रांस से सागरों की परिक्रमा का उनका सफर शुरू हुआ था। 13 देशों के 18 नामी नाविक इसमें भाग ले रहे थे। कमांडर टोमी न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया से अकेले प्रतियोगी थे।

उन्होंने सागरों की तीस हजार किलोमीटर की केवल 40 प्रतिशत परिक्रमा तय की थी कि सितम्बर के तीसरे सप्ताह में थुरिया नाम की उनकी नौका भीषण समुद्री बवंडर में फंस गई जिसकी वजह से वह अपने को सम्भाल नहीं सके औऱ 14 मीटर उंची तरंगों में फंस कर नौका में ही गिर गए। एक फ्रांसीसी मछलीमार नौका आसिरिस के नाविकों ने तीन दिनों बाद उन्हें निकाला। थुरिया नौका को भारतीय नौसेना के पी-8-आई टोही विमान से खोजा गया था। उन्हें दक्षिणी हिंद महासागर के फ्रांसीसी द्वीप इले एमस्टर्ड्म में एक अस्पताल भेजा गया। वहां से उन्हें भारत लाया गया औऱ सेना के अस्पताल में भर्ती किया गया। ऑपरेशन के बाद उनकी पीठ में टाइटेनियम की दो छड़ें लगाई गई हैं जिनके सहारे वह अपनी सामान्य जिंदगी जीने लगे हैं लेकिन वह पूरी तरह सागरीय यात्रा के लिये चुस्त नहीं हुए हैं। उनका कहना है कि वह पूरी तरह फिट होने का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद करते है कि 2022 की ऐसी ही सम्पूर्ण सागरीय नौकायन प्रतियोगिता के लिये निकल सकेंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या कभी उन्हें लगा था कि अब तो वह जिंदा नहीं बचेंगे कमांडर टोमी ने कहा कि चूंकि वह टोही पायलट रह चुके हैं इसलिये समुद्र में फंसे लोगों को बचाकर निकालने का उनका अनुभव रहा है। इसलिये उन्हें विश्वास था कि वह भी बच निकलेंगे।

कमांडर टोमी 21 जुलाई को जब फ्रांस से रवाना हुए थे तब वह काफी जोश से भरे थे और सागर परिक्रमा में अन्य प्रतियोगियों में काफी आगे चल रहे थे। इस नौका प्रतियोगिता की खासियत यह थी कि किसी भी प्रतियोगी को अपने साथ दिशा बताने वाले आधुनिक गैजेट जैसे सेटेलाइट फोन, जीपीएस उपकरण आदि रखने की अनुमति नहीं थी।

गौरतलब है कि 2013 में वह पहले भारतीय थे जिन्होंने पूरी पृथ्वी की सागरीय परिक्रमा स्वदेशी नौका म्हादेई पर की थी। 2013 में उन्हें राष्ट्रपति ने कीर्ति चक्र से सम्मानित किया था। उन्हें तेंजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड भी मिल चुका है।

कमांडर टोमी दुर्घटना के बाद जब अस्पताल में थे तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हुई फोन वार्ता की याद करते हुए वह कहते हैं कि वह तब भी पूरे आत्मविश्वास में थे और उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा था कि वह फिर सागरीय परिक्रमा के लिये लौटेंगे। कमांडर टोमी ने उनसे कहा था कि वह समुद्र में तुरंत लौटना चाहते हैं।

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