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स्पेशल रिपोर्ट: एम्फीबियस एयरक्राफ्ट US-2 पर चल रही है बातचीत, जल्द हो सकता है फैसला

Amphibious-Aircraft US- 2
एम्फीबियस एयरक्राफ्ट US-2 (प्रतीकात्मक)

समुद्र और जमीन पर उतरने की क्षमता रखने वाले एम्फीबियस एयरक्राफ्ट US-2 भारत को बेचने पर बातचीत जारी रहने का खुसाला करते हुए यहां जापानी राजदूत ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही इस बारे में फैसला हो सकता है। उल्लेखनीय है कि जापान ने समुद्री सतह पर उतरने वाले अपने उभयस्थलीय विमान US-2 भारत को बेचने की पेशकश तीन साल पहले की थी लेकिन इसकी कीमतों को लेकर विवाद चल रहा था। राजदूत केंजी हीरामात्सु ने बताया कि मानवरहित जमीनी वाहन और रोबोटिक्स के क्षेत्र में भी जापान भारत के साथ साझा शोध और सहयोग कर रहा है।





सामरिक और रक्षा क्षेत्र में जापान भारत के साथ सहयोग का दायरा बढ़ाएगा। यहां भारत,  जापान औऱ अमेरिका के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक के बाद जापान ने चार अप्रैल को यह अहम बयान दिया है। यहां भारत-जापान संसदीय परिषद मंच की बैठक में जापानी राजदूत केंजी हीरामात्सु ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में जापान ने अब तक पारम्परिक रवैया अपनाते हुए विदेशों के साथ रक्षा सहयोग में सावधानी बरती है  लेकिन जापानी कैबिनेट ने चार साल पहले रक्षा साज सामान और तकनीक के हस्तांतरण को मंजूरी देने के लिये तीन नये सिद्धांत अपनाए थे। इसके बाद जापान ने अब संकल्प लिया है कि अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा को मजबूत करने के लिये जरूरी सैनिक साज-सामान बेचने के इरादे से जापान सक्रियता दिखाएगा।

जापानी राजदूत हीरामात्सु ने यहां कहा कि ऐसा कर जापान अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा को मजबूत करने में अपना योगदान देगा। इसके जरिये जापान अपने मित्र देशों और साझेदारों के साथ सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत बनाएगा। राजदूत ने कहा कि भारत के साथ सुरक्षा और सामरिक सहयोग को जापान प्राथमकिता दे रहा है। इस इरादे से जापान भारत के साथ साझा नौसैनिक अभ्यास मालाबार में भाग ले रहा है। यह अभ्यास अब तक भारत और अमेरिका के बीच दि्वपक्षीय तौर पर होता रहा है। इसके साथ ही जमीन और आकाश में भी दोनों देशों की सेनाएं आदान-प्रदान और सहयोग बढ़ाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में भारत के साथ साझा अभ्यासों का विस्तार होगा। इस इरादे से दोनों देश हिंद प्रशांत समुद्री इलाके पर भी नजर रख रहे हैं। उल्लेखनीय है कि हिंद प्रशांत इलाके में चीन की नौसेना की बढ़ती गतिविधयों की वजह से न केवल भारत और जापान बल्कि पूरे विश्व जगत में चिंता छाई है।

उल्लेखनीय है कि भारत और जापान के बीच सामरिक सहयोग को गहरा करने के मसले पर बातचीत करने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पिछले सप्ताह तोक्यो का दौरा किया है। जापानी विदेश मंत्री तारा कोनो के साथ सुषमा स्वराज की रिश्तों के हर पहलू पर गहन बातचीत हुई है और दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंदमहासागर के इलाके में चीनी नौसेना के युद्धपोतों द्वारा धौंस दिखाने पर भी बात हुई है। इस साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी सालाना शिखर बैठक के लिये जापान दौरा होने वाला है जिसकी सफलता के लिये जापानी अधिकारी समुचित जमीन तैयार कर रहे हैं। भारत और जापान के बीच गहराते सामरिक रिश्तों की वजह से चीन के सामरिक हलकों में चिंता है।

उल्लेखनीय है कि हिंद प्रशांत इलाके में चीन की सामरिक चुनौतियों से मुकाबला करने के इरादे से ही भारत,  जापान और अमेरिका ने आस्ट्रेलिया को साथ लिया है। यहां चार अप्रैल को भारत, जापान और अमेरिका ने जो त्रिपक्षीय बैठक की है उसके बाद जारी साझा बयान यह दर्शाता है कि भारत, जापान और अमेरिका साथ मिल कर चीन की दादागिरी का मुकाबला करने के लिये तैयार हो रहे हैं।

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