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लागू हो रही है शेकातकर कमेटी की रिपोर्ट

रक्षा मंत्रालय

नई दिल्ली। सेना की लड़ाकू क्षमता और रक्षा खर्च को  पुनर्गठित करने के मसलों पर विचार करने के लिये गठित शेकातकर कमेटी की रिपोर्ट के कई हिस्से स्वीकार कर लिये गए हैं और  इन्हें लागू किया जा रहा है।





 रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने अम्बिका सोनी और टी सुब्बारानी रेड्डी के एक सवाल के जवाब में लोकसभा में सोमवार को बताया कि शेकातकर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दिसम्बर, 2016 में सौंपी थी। रक्षा मंत्रालय ने कुछ सुझावों  को व्यवहार में लाने और उन्हें लागू करने के रोडमैप तैयार करने के लिये काम शुरू कर दिया  है।

  निम्न  मुख्य सुझाव हैं जिन पर कार्रवाई की गई है:

  1. सिगनल संस्थानों को संतुलित बनाने के  लिये इसमें रेडियो मानटरिंग कम्पनियां,. कोर एयर सपोर्ट सिगनल रेजीमेंट, एयर फार्मेशन सिगनल रेजीमेंट , कम्पोजिट सिगनल रेजीमेंट शामिल  किया गया है। इसके अलावा इंजीनियरिंग सिगनल रेजीमेंटों का विलय  किया गया।
  2. थलसेना की मरम्म करने वाली यूनिटों का पुनर्गठन  किया गया। इसमें बेस वर्कशाप, एडवांस बेस वर्कशाप, और स्टेटिक स्टेशन वर्कशाप शामिल हैं।
  3. सेना की आयुध इकाइयों का पुनर्गठन जिसमें शामिल है वेहीकल डिपो, आर्डनेंस डिपो , और सेन्ट्रल आर्डनेंस डिपो
  4. सप्लाई और परिवहन इकाइयों  और पशु परिवहन इकाइयों का बेहतर इस्तेमाल,
  5.  शांति  के इलाकों में मिलिट्री फार्म्स और आर्मी पोस्टल इसटैबलिशमेंट्स को बंद करना।
  6. सेना में क्लर्कों और ड्राइवरों की भर्ती का स्तर बढ़ाना
  7. नेशनल कैडेट कोर की कार्यक्षमता को बढ़ाना

 सरकार ने बताया कि शेकातकर कमेटी की पूरी रिपोर्ट औऱ सिफारिशों को आपरेशनल वजहों से सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। इसका खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिये से ठीक नहीं होगा। सेना की लड़ाकू क्षमता को बढाना सतत प्रक्रिया है और वक्त वक्त पर जरूरी कदम उठाए जाते हैं।

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