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पैरा मिलिट्री परिवारों की रैलीः अपनी मांगों के लिए दिया 15 अगस्त तक का समय

पूर्व सैनिकों की रैली

नई दिल्ली। देश के तकरीबन बीस लाख अर्धसैनिक परिवारों के हजारों आश्रितों ने आक्रोश भरे मन से दिल्ली के संसद मार्ग पर अपनी बातें रखीं। उन्होंने साफ कहा कि केन्द्र सरकार उनकी जायज मांगों पर सौतेला व्यवहार कर रही है। देश के दूर-दराज इलाकों से आए इन परिवारों ने यहां तक कहा कि सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं करेगी तो सन् 2019 में होने वाले आम चुनाव तथा नजदीक विधानसभा चुनाव में हम बीस लाख अर्धसैनिक परिवार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और उसी को वोट देंगे जो हमारी जायज मांगों को अपने घोषणापत्र में शामिल करेगा।





पूर्व सैनिकों की रैली

मांगों को लेकर धरना, प्रदर्शन, घेराव तथा रैली कन्फेडेरशन ऑफ एक्स पैरा मिलिट्री फोर्सेज वेल्फेयर एसोसिएशन ने किया। इस संगठन की प्रमुख मांगे हैं-सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर वन रैंक वन पेंशन लागू की जाये, मिलिट्री सर्विस-पे की तर्ज पर अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी पैरा मिलिट्री सर्विस-पे दी जाये, हर राज्य में केन्द्रीय अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड की स्थापना हो, शहीद के आश्रित परिवार को मुआवजे के तौर पर एक करोड़ रुपये तथा परिवार के पुनर्वास की व्यवस्था, सैनिक स्कूल AFMC पुणे की तर्ज पर हर राज्य में अर्धसैनिक स्कूल, इंजीनियरिंग तथा मेडिकल कॉलेज खोलने तथा हर राज्यों के तमाम जिलों में CGHS डिस्पेंसरी की स्थापना हो।

उमस भरी दोपहरी में नई दिल्ली के संसद मार्ग पर CRPF, BSF, ITBP, CISF, SSB व ASAM RIFLES बल के करीब पांच हजार से भी अधिक संख्या में आये परिवारों ने धरना दिया और प्रदर्शन किया। इस रैली में दिल्ली और एनसीआर के अलावा दूर-दराज के राज्यों केरल, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश आदि राज्यों से आए सदस्यों में मांगों को लेकर रोष, असंतोष और बेचैनी दिखी।

पूर्व सैनिकों की रैली

केरल से आई अर्धसैनिक परिवारों की महिलाओं ने कहा इस बढ़ती महंगाई से घर चलाना, बच्चों की पढ़ाई करवाना मुश्किल हो रहा है। नीम का थाना, सीकर (राजस्थान) से आए संगठन के सक्रिय सदस्य और CRPF से सेवा निवृत्त हो चुके इंस्पेक्टर जगदीश चाहर कहते हैं कि हमारी मांगों पर सरकार को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए। CRPF में काम कर चुके कर्नाटक से आए हनुमंत राजू का कहना है कि सरकार अर्धसैनिक परिवारों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। CISF से सेवानिवृत्त अलवर के राजेन्द्र सिंह नरुका कहते हैं कि हमारी मांगे तथा आक्रोश जायज है इस पर सरकार को सोचना होगा।

संगठन के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री को सौंपा। एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी रणवीर सिंह ने इस बात की उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री ने जिस तरह पूर्व में 15 अगस्त पर लाल किले के प्राचीर से सेना के लिए वन रैंक वन पेंशन का उपहार दिया था उसी तरह आगामी 15 अगस्त को वह अर्धसैनिक परिवारों के लिए सन् 2004 से बंद पेंशन फिर से चालू करने तथा वन रैंक वन पेंशन की घोषणा करेंगे।

सगंठन ने यह भी कहा है कि अगर सरकार ने उनकी जायज मांगों को स्वतंत्रता दिवस पर घोषित नहीं किया तो अर्धसैनिक परिवार के आश्रित 28, 29 और 30 सितंबर 2018 को संसद मार्ग पर भूख हड़ताल करेंगे। फेडरेशन के मुताबिक बाद में गांधीवादी और शांतिपूर्ण तरीके से 13 दिसंबर 2018 को हजारों अर्धसैनिक परिवारों के साथ संसद मार्ग पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। गौरतलब है कि 13 दिसंबर को संसद पर हुए आतंकी हमले का मुकाबला करते हुए CRPF के कई जवान शहीद हुए थे।

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