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रायसीना डायलॉग शुरू, दो हजार प्रतिनिधि दिल्ली में

नार्वे की प्रधानमंत्री इरना सोलबर्ग और पीएम मोदी
नार्वे की प्रधानमंत्री इरना सोलबर्ग और पीएम मोदी

नई दिल्ली। सामरिक मसलों पर चर्चा का एक औऱ अहम सम्मेलन साबित होने वाले चौथे रायसीना डायलॉग की शुरुआत मंगलवार को यहां हुई। इसका उद्घाटन नार्वे की प्रधानमंत्री इरना सोलबर्ग ने किया। इस मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद थे।





इस साल के रायसीना डायलॉग में 90 देशों के 600 डेलीगेट और 2,000 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। 8 से 10 जनवरी तक आयोजित होने वाले रायसीना डायलॉग में भू-राजनीति और भू-आर्थिक मसलों पर गहन चर्चा 10 जनवरी तक चलेगी। इस सम्मेलन में कई देशो: ईऱान, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, इटली, मंगोलिया, जापान आदि के विदेश मंत्री अपने विचार रखेंगे। इनके अलावा कई देशों के पूर्व राष्ट्रपति औऱ प्रधानमंत्री भी मौजूद रहेंगे जो मौजूदा विश्व हालात पर अपने विचार रखेंगे। इनमें ब्रिटिश पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, इटली के पूर्व प्रधानमंत्री पाओलो गेंटीलोनी, कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री कार्ल बिल्ट, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजाई आदि शामिल हैं।

ब्रिटेन ने भी अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मार्क सेडविल की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय शिष्टमंडल भेजा है। इस बारे में यहां ब्रिटिश उच्चायुक्त डोमिनक एस्किथ ने कहा कि ब्रिटेन द्वारा इस उच्चस्तरीय शिष्टमंडल को भारत भेजना इस बात का सूचक है कि भारत औऱ ब्रिटेन के बीच रिश्ते कितनी गहराई ले चुके हैं।

रायसीना डायलॉग अब एशिया के अग्रणी वैचारिक सम्मेलन के तौर पर उभर चुका है। अब तक सिंगापुर में हर साल आयोजित होने वाला शांगरीला डायलॉग ही दुनिया के नेताओं को आकर्षित करता रहा है लेकिन अब रायसीना डायलॉग भी सामरिक हलकों में वही प्रतिष्ठा हासिल करने लगा है। इस सम्मेलन का आयोजन भारतीय विदेश मंत्रालय और विचार संस्था आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) द्वारा साझा तौर पर आयोजित किया गया है।

दस जनवरी को इस सम्मेलन के समापन सत्र को मलयेशिया के भावी प्रधानमंत्री अनवर इब्राहीम सम्बोधित करेंगे।

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