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राष्ट्रपति कोविंद सियाचिन जाएंगे, मिलेंगे बर्फीली चोटियों पर तैनात जवानों से

आईटीबीपी

नई दिल्ली। 14 वर्ष बाद भारत के राष्ट्रपति सियाचिन का दौरा करेंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का दस मई को सियाचिन के लिये होने वाला यह दौरा जहां बर्फीली पहाड़ियों पर तैनात जवानों के लिये मनोबल बढ़ाने वाला होगा वहीं यह पड़ोसी देशों के लिये भी संदेश देगा कि भारत जम्मू-कश्मीर के लद्दाख इलाके में स्थित दुनिया के इस सबसे ठंडे इलाके की एक-एक इंच जमीन की रक्षा के लिये कृतसंकल्प है।





पिछली बार 2004 में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सियाचिन का दौरा किया था। इस दौरे में राष्ट्रपति  कोविंद सियाचिन की कुमार चौकी पर भी जाएंगे और वहां तैनात जवानों से मिलेंगे।

13 अप्रैल, 1984 को भारतीय थलसेना ने अपने जवान वहां तब तैनात किये थे जब पाकिस्तानी सेना की नापाक नजर इस इलाके पर पड़ी। सियाचिन की बर्फीली चोटियों की रक्षा के लिये तब भारतीय सेना ने आपरेशन मेघदूत चलाया था जो आज तक चल रहा है। दुनिया का यह सबसे ऊंचा रणक्षेत्र करीब एक हजार वर्ग मील में फैला है। इस इलाके में तापमान शून्य से 40 डिग्री से. के नीचे तक चला जाता है। इस इलाके में भारत और पाकिस्तान के सैनिकों के बीच अक्सर होने वाली गोलीबारी पर तब विराम लगा जब भारत और पाकिस्तान के बीच 2003 में संघर्ष विराम समझौता हुआ।

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