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‘अर्धसैनिक बलों के परिवारों के हकों की बात करने वाले को ही वोट मिलेगा’

जनरल सेक्रेटरी रणवीर सिंह

देश के तकरीबन 20 लाख अर्धसैनिक बलों के परिवारों के हजारों आश्रित अपने मन की बात रखने और जायज मांगों को केन्द्र सरकार से कहने के लिए आगामी 5 जुलाई 2018 को नई दिल्ली आ रहे हैं। केरल, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर से आने वाले ये परिवार संसद मार्ग पर वन रैंक वन पेंशन, 2004 के बाद जवानों की बंद पेंशन, पचास प्रतिशत जीएसटी फ्री सीपीसी कैंटीन, हर राज्य के जिले में सीजीएचएस डिस्पेंसरी की स्थापना आदि मांगों के लिए संसद मार्ग पर रैली, धरना और प्रदर्शन करेंगे। रैली की जोरदार तैयारियों के बीच कन्फेडेरेशन ऑफ एक्स पैरा मिलिट्री फोर्सेस वेल्फेयर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी रणबीर सिंह से कई मुद्दों पर विस्तार बात हुई।





प्रस्तुत हैं बातचीत के खास अंशः

रणवीर सिंह

एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी रणबीर सिंह

प्रश्नः आपने तीन महीने पहले अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया था। क्या रहा ?

उत्तरः प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया था। खेद है कि वह गृह मंत्रालय को भेज दिया गया। केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू से तीन बार मुलाकात हुई। लेकिन अभी तक कुछ हुआ नहीं है।

प्रश्नः तीन महीने पहले आपके संगठन ने राजघाट पर हड़ताल कर औऱ वहां से चलकर राष्ट्रपति भवन तक अर्धनग्न प्रदर्शन किया था। ऐसा क्यों ?

उत्तरः बापू के चरणों में जाकर उन्हीं के तरीके से भूख हड़ताल की थी। अर्धनग्न प्रदर्शन ध्यान आकर्षित करने के लिए किया जाता है। वही किया था। पहले भी कर चुके हैं। पर फिर भी मीडिया के तमाम साथी सरहद के अनुशासित सिपाहियों की मांगों को लोगों तक पहुंचाने के लिए नहीं दिखे।

विरोध प्रदर्शन

प्रश्नः क्या आपको विश्वास है कि CRPF, BSF, ITBP, CISF, SSB तथा असम राइफल्स की इतनी सारी मांगे मान ली जाएंगी ?

उत्तरः जायज मांगे हैं। हमारे संगठन के पास इच्छा शक्ति है। भारतीय सेना बड़े भाई की तरह है। वह बैरकों में है। हम चुनौतियों के बीच सेना पर मुस्तैदी से खड़े हैं। बाढ़, भूकंप, प्राकृतिक आपदा सभी जगह देशवासियों की खातिर हम तैनात हैं। हमारी बात पर सरकार जरूत गंभीरता से विचार करेगी।

प्रश्नः क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि सरकार अर्धसैनिक बलों के जवानों और उनके घर-परिवार के लोगों की मांगों पर ध्यान नहीं दे पा रही ?

उत्तरः माननीय प्रधानमंत्री एक उम्दा इनसान हैं। वह जमीनी सोच के व्यक्ति हैं। ऐसा नहीं कह सकते कि सरकार हमारी बात को नहीं सुन रही है। सरकार जरूर हमारी बात को सुनेगी, सोचेगी।

प्रश्नः आगामी पांच जुलाई को आप संसद मार्ग पर प्रदर्शन (90 दिनों के बाद दोबारा) करने जा रहे हैं। मांग बढ़ी हैं या वहीं हैं ?

उत्तरः हमारी मांगें पूर्ववत हैं। तैनात जवान के लिए भी और आश्रित जवानों के लिए भी।

प्रश्नः जवानों के लिए अब तक सबसे बड़ी मांग कौन सी है?

उत्तरः सन 2000 से बंद पेंशन दोबारा चालू हो। ताकि पूर्व जवानों. आश्रितों के परिवार का भविष्य बेहतरी की ओर बढ़े।

प्रश्नः धरना, प्रदर्शन व रैली के दौरान आश्रित परिवारों विशेषरूप से महिलाओं का समर्थन किस प्रकार का रहता है?

उत्तरः वह मातृशक्ति हैं। नारी के बढ़ते कदम और उनकी भूमिका सभाओं और रैलियों को तो मजबूत करती ही हैं, संगठन को भी मजबूती मिली है। उनकी भागीदारी से देशभर में आंदोलन को नई ताकत मिली है।

प्रश्नः मांगे नहीं मानी गईं तो क्या करेंगे?

उत्तरः हम अनुशासित, मर्यादित सिपाही हैं। गांधी के अनुयायी हैं। ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे देश या संगठन की आन-बान-शान पर चोट आय़े। अपनी बात रखते रहेंगे। पर यह तय है कि 20 लाख अर्धसैनिक बलों के परिवारों का वोट उसीको मिलेगा जो हमारे हक की बात करेगा।

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