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हाथ घायल हुए तो पैरों में बंधवा ली मशीनगन, मरते दम तक दुश्मन से जूझते रहे मेजर शैतान सिंह से जुड़ी 9 खास बातें

मेजर शैतान सिंह भारत मां का एक ऐसा लाल जिसने मरते दम तक देश के लिए मर मिटने की कसमें खाई थीं और ऐसा किया भी। 1962 में भारत-चीन युद्ध में  मेजर शैतान सिंह के साथ मात्र कुछ सैनिक बचे, लेकिन वे बुरी तरह घायल थे। इस दौरान मेजर के दोनों हाथ घायल हो चुके थे। सैनिकों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने को कहा लेकिन शैतान सिंह ने सैनिकों से कहा कि उनके पैरों के साथ लाइट मशीनगन बांध दी जाए। सैनिकों ने ऐसा ही किया और मेजर अपने पैरों से फायरिंग करते हुए शहीद हो गए। सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर शैतान सिंह हमेशा मदर इंडिया के सबसे जांबाज सपूत के रूप में याद किए जाते हैं। इस जांबाज मेजर से जुड़े कुछ ऐसी ही बातें हम आपको बता रहे हैं :-





शैतान सिंह  ने 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान बहादुरी से किया सेना का नेतृत्व 

1924 में एक दिसंबर को जोधपुर (राजस्थान) में जन्मे सिंह को वीरता और बहादुरी विरासत में मिली। उनका पूरा नाम मेजर शैतान सिंह भाटी था। उनके पिता हेमसिंह भाटी भी सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल रहे थे। शैतान सिंह ने 1 अगस्त 1949 को भारतीय सेना की 13वीं कुमाऊं बटालियन में कदम रखा था। 1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान बेहद बहादुरी से सेना का नेतृत्व किया।

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