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कश्मीर में अब आतंकियों की खैर नहीं, सेना लेगी ‘डिजिटल मैपिंग’ की मदद

भारतीय सेना

श्रीनगर। भारतीय सेना कश्मीर में आतंकियों से निपटने के लिए अब गांवों की डिजिटल मैपिंग पर कार्य शुरू किया है। यह कार्य कुछ चिन्हित इलाकों से शुरू की जा रही है, जो इलाके काफी संवेदनशील हैं। इसमें अधिकतर दक्षिण कश्मीर के गांव शामिल हैं। डिजिटल मैपिंग द्वारा सेना को आतंकियों को घेरने और उन्हें ठिकाने लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही आतंकियों के खिलाफ चलाए जाने वाले ऑपरेशन में सेना के जवान ज्यादा सुरक्षित रह सकेंगे।





वैसे कश्मीर के गांवों की मैपिंग की गई है लेकिन यह अभी पेपर में ही है। इसे कभी कभी सूचना के आधार पर अपडेट किया जाता है। मैपिंग से आतंकियों को घेरने में उस जगह की असल स्थिति और नक्शे का अंदाजा रहता है। जब आर्मी कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन चलाती है तब भी मैपिंग से मदद मिलती है। इससे मालूम यह चलता है कि कहां-कहां सर्च ऑपरेशन करना है। अगर कभी खुफिया इनपुट के आधार पर सेना आतंकियों की घेराबंदी करती है तो मैपिंग के जरिए सेना अपनी रणनीति तैयार करती है, जिससे आतंकवादियों को फरार होने का कोई भी मौका न मिल सके।

पेपर में जो मैपिंग है उससे आर्मी अनुमान लगाती है, पर जब यह मैपिंग डिजिटल हो जाएगी तो इसमें हर चीज डिटेल से मुहैया हो जाया करेगी। अभियान से पहले उस क्षेत्र का पूरा जायजा लिया जाएगा, जो सेना के लिए काफी महत्वपूर्ण होगा। अभी गांवों के कुछ गांवों की डिजिटल मैपिंग का ही काम शुरू हुआ है। पहले उन एरिया को फोकस किया जा रहा है जो खुफिया इनपुट के हिसाब से आतंकियों की शरणगाह रहे हैं या जहां रेडिकलाइजेशन अधिक हुआ है। इसके बाद डिजिटल मैपिंग के विस्तार की योजना है।

एक अखबार ने सुरक्षा एजेंसी के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि कई बार जब खुफिया इनपुट के आधार पर तलाशी अभियान चलाया जाता है तो उस जगह के सही नक्शे का अंदाजा नहीं होने के कारण आतंकी इसका फायदा उठा लेते हैं। और जब डिजिटल मैपिंग हो जाएगी तो वैसे जगहों को पिनप्वाइंट करके अभियान चलाने में पूर्ण सहयोग मिलेगा।

 

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