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इस जैकेट पर नहीं होगा आतंकियों की स्टील बुलेट का असर 

बुलेट प्रूफ जैकेट में इंडियन आर्मी
बुलेट प्रूफ जैकेट में इंडियन आर्मी (प्रतीकात्मक)

नई दिल्ली। सरहद पर तैनात जवानों की सुरक्षा के लिए खरीदी जाने वाली बुलेट प्रूफ जैकेट के लिए रक्षा मंत्रालय ने नए मानक तय किए हैं। नए मानक वैश्विक मानकों के अनुरूप होंगे। नए मानकों के तहत बुलेट प्रूफ जैकेट शरीर के ज्यादा भाग को कवर करेगी और उसका वजन भी ज्यादा होगा। यह जैकेट जवानों को आतंकियों की स्टील बुलेट से भी बचाएगी।





एक अखबार ने रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि बुलेट प्रूफ जैकेट के लिए निर्धारित मानक वैश्विक मानकों से कम थे। अब इन मानकों में बदलाव किया गया है। अब जिन मानकों के तहत बुलेट प्रूफ जैकेट खरीदी जाएंगी वह रुस, अमेरिका और ब्रिटेन की सेनाओं में इस्तेमाल हो रही जैकेट के अनुरूप होंगे।

मानकों में मुख्य रूप से दो बदलाव किए गए हैं। पहला यह कि जैकेट शरीर पर ज्यादा भाग को कवर करेगी और दूसरा इसका वजन भी पहली जैकेटों के मुकाबले ज्यादा होगा। पहले इस्तेमाल की जा रही जैकेट का वजन 5.5 किलोग्राम था लेकिन नए मानकों के तहत जो जैकेट खरीदी जाएंगी उनका वजन 10.1 किलोग्राम से लेकर 11.3 किलोग्राम के बीच होगा। विकसित देशों में से अधिकांश इसी तरह की जैकेट अपने जवानों को मुहैया कराते हैं।

नए मानकों के तहत खरीदी जाने वाली जैकेट जवानों को आतंकियों की स्टील बुलेट से भी बचाएंगी। इन जैकेटों के सामने स्टील बुलेट भी बेअसर साबित होंगी। नई जैकेटों को खरीदने से पहले यह भी देखा जाएगा कि ये स्टील बुलेट को झेलने में कितनी कारगर हैं। पुराने मानकों के अनुरूप इस्तेमाल की जा रही जैकेटों के मामले में कई बार यह देखने में आया कि ये स्टील बुलेट से बचाव नहीं कर पा रही हैं।

अखबार ने रक्षा सूत्रों के हवाले से लिखा है कि नए मानकों के अनुरूप जैकेटों का निर्माण देश में हो इसके लिए दस कंपनियों को लाइसेंस भी दिए गए हैं। चार कंपनियों ने तो जैकेट बनाने का काम शुरू भी कर दिया है। आर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड और रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO) भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। DRDO निर्मित जैकेट का फिलहाल परीक्षण चल रहा है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक कुल 1.86 लाख जैकेट खरीदी जाएंगी। जरूरत को देखते हुए 50 हजार जैकेट पहले ही खरीदी जा चुकी हैं।

 

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