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डोकलाम के बाद नाथु ला का रास्ता कैलाश मानसरोवर के लिये फिर खुला

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज

 





नई दिल्ली। पिछले साल भूटान के दावे वाले डोकलाम इलाके में भारत औऱ चीन की सेनाओं के बीच हुई तनातनी के दौरान नाथु ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा रद्द कर दी गई थी जिसे इस साल फिर खोला जाएगा। कैलाश-मानसरोवर यात्रियों के लिये नाथु ला का रास्ता फिर से खुलने के बाद वहां जाने वाले यात्रियों के नामों की सूची कम्प्यूटर के जरिये विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यहां मंगलवार को जारी की।

इस मौके पर विदेश मंत्री स्वराज ने कहा कि सरकारों के बीच रिश्ते तब तक प्रगाढ़ नहीं हो सकते हैं जब तक जनता स्तर पर सम्पर्क मजबूत नहीं हो। पिछले साल जब नाथु ला रास्ता बंद कर दिया गया था तो इससे जनता में भारी निराशा पैदा हुई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस रास्ते यात्रियों को भेजने के कार्यक्रम का एलान करते हुए खुशी हो रही है। कैलाश मानसरोवर का दूसरा रास्ता उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रा से होकर है।

विदेश मंत्री ने कहा कि लिपुलेख दर्रा के जरिये हम 60 यात्रियों के 18 बैच भेजेंगे और 50 यात्रियों के दस जत्थे नाथु ला के रास्ते भेजेंगे। कुल मिलाकर 1580 यात्री इस साल कैलाश मानसरोवर जाएंगे। यात्रियों के चयन की पूरी प्रक्रिया कम्प्टूयर के जरिये होती है जिसमें यात्रियों के लिये कई मानक तय किये गए हैं। इसके जरिये पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बरती जाती है।

चार महीने का यात्रा कार्यक्रम जून से शुरू होगा। सितम्बर तक चलने वाले इस कार्यक्रम का आयोजन विदेश मंत्रालय चीन सरकार के सहयोग से करता है। नाथु ला का रास्ता भारतीय यात्रियों के लिये 2015 में खोला गया था। नाथु ला पार करने के बाद भारतीय यात्रियों को चीनी वाहनों के जरिये कैलाश तक पहुंचाया जाता है।

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