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सैन्य कमांडरों ने कहा- युवकों को जेहादी सोच छोड़ने को प्रेरित किया जाए

आतंकी
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। यहां इस सप्ताह चल रहे छमाही सैन्य कमांडर सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित करने के प्रयासों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। हाल में भारी संख्या में कश्मीरी युवकों द्वारा बंदूक थामने की रिपोर्टों के बीच सैन्य कमांडरों ने कहा है कि जेहादी मानसिकता वाले युवकों को जेहादी सोच छोड़ने को प्रेरित किया जाए और सामूहिक प्रयासों से उन्हें मुख्यधारा में लाया जाए।





जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ तेज किये गए अभियान के साथ ही कमांडरों ने कहा है कि प्रति आतंकवादी कार्रवाई इस तरह चलाई जाए कि आसपास के लोगों को नुकसान नहीं पहुंचे।

सैन्य कमांडरों के सम्मेलन में विचारणीय मसलों की जानकारी देते हुए थलसेना के एक आला अधिकारी ने बताया कि युवकों को हिंसा और बंदूक संस्कृति का त्याग करने को समझाया जाए। कमांडर सम्मेलन गत  16 अप्रैल को शुरु हुआ था जो 21 अप्रैल तक चलेगा। अधिकारी के मुताबिक सम्मेलन के दौरान नियंत्रण रेखा पर मौजूदा हालात और संघर्षविराम उल्लंघनों से पैदा स्थिति पर चर्चा की गई। कमांडरों ने इस इलाके में सैन्य तैनाती और सैन्य कार्रवाई के तौर-तरीकों पर विचार किया।

थलसेना में संगठनात्मक सुधार लाने के इरादे से तीन साल पहले रक्षा मंत्रालय द्वारा गठित शेकातकर कमेटी की रिपोर्ट में की गई सिफारिशों को समयबद्ध तरीके से लागू करने औऱ इसमें पेश चुनौतियों से निबटने के मसले पर भी चर्चा की गई। थलसेना में साइबर सुरक्षा और सैन्य प्रतिष्ठानों औऱ इसके अड्डों की सुरक्षा के लिये अपनाए जाने वाले उपायों पर भी विचार किया गया।

इसके अलावा चीन से लगी सीमाओं पर भी ताजा हालात की कमांडरों ने समीक्षा की। इस इलाके में ढांचागत विकास और उनमें तेजी लाने के उपायों पर भी विचार किया गया। इस सम्मेलन का उद्घाटन रक्षा राज्य मंत्री सुभाष रामराव भ्रामरे ने किया था और थलसेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने इसे सम्बोधित कर विचारणीय मसलों पर अपने विचार रखे। शनिवार को चीन और पाकिस्तान से लगने वाले  विभिन्न सीमांत इलाकों में सैन्य कार्रवाई का आकलन किया जाएगा।

जनरल रावत ने सम्मेलन में इस बात पर संतोष जाहिर किया कि तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल के अनुरूप भारतीय थलसेना अपने को ढाल रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आवंटित संसाधनों का बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से इस्तेमाल किया जाए और सेना का आधुनिकीकरण लगातार जारी रहे।

कमांडरों ने कहा कि सैन्य आधुनिकीकरण और क्षमता निर्माण के लिये जो संसाधन आवंटित किए गए हैं उनका बजटीय प्रावधानों के तहत समुचित इस्तेमाल किया जाए। थलसेना में मानव संसाधन के समुचित प्रबंध पर भी विचार किया गया।

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