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वतन के लिए प्रेम और मर-मिटने का जज्बा पैदा करता है मिलिट्री बैंड, जानें 9 खास बातें

युद्ध और संगीत यूं तो एक दूसरे के विपरीत बातें हैं लेकिन जो संगीत एक तरफ रूह को सुकून देता है। वहीँ, जंग के मैदान में दुश्मन के खिलाफ जवानों में कुछ कर गुजरने के भाव भी भर देता है। युद्ध के मैदान में बजने वाला संगीत जवानों में अपने वतन के लिए प्रेम और मर-मिटने का जज्बा पैदा करता है। आखिर क्या है भारतीय मिलिट्री बैंड की खूबियां और कितनी खास हैं सेना के संगीत की धुनें, आइये जानते हैं-





1950 में बना ‘मिलिट्री स्कूल ऑफ म्यूजिक’

आर्मी बैंड

आज हम जिस भारतीय मिलिट्री बैंड से परिचित हैं, उसकी कहानी 300 साल के ब्रिटिश मिलिट्री बैंड के इतिहास से जुड़ी है। ब्रिटिश राज खत्म हुआ तो मिलिट्री बैंड का भारतीयकरण शुरू हुआ। कमांडर इन चीफ फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने इस चुनौती को स्वीकार किया और 1950 में मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में ‘मिलिट्री स्कूल ऑफ म्यूजिक’ की नींव रखी। इसे ‘नेलर हॉल ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है। यही वह समय था जब भारतीय धुनों पर आधारित हिंदुस्तानी मिलिट्री बैंड को आकार दिया गया।

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