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प्राइवेट शिपयार्ड में बन रहे हैं समुद्री गश्त पोत

युद्धपोत

नई दिल्ली। भारत का प्राइवेट सेक्टर अब रक्षा बलों के लिये देश में ही डिजाइन किया हुआ युद्धपोत बनाने लगा है। लार्सन एंड टूब्रो प्राइवेट सेक्टर की ऐसी पहली कंपनी है जिसने भारतीय कोस्ट गार्ड के  लिये ऑफशोर पेट्रोल वेसेल बनाने का बीडा उठाया है।





ऐसा पहला ऑफशोर पेट्रोल वेसेल (ओपीवी) गत अप्रैल महीने में कोस्ट गार्ड को सौंपा गया था। इसी तरह  के पांचवें और छठे आफशोर पेट्रोल वेसेल की कील चेन्नै के निकट कट्टुपल्ली गोदी में कोस्ट गार्ड के इंस्पेक्टर जनरल  टी पी सदानंदन ने डाली। पहला ओपीवी तो तय वक्त से पहले ही कोस्ट गार्ड को सौंपा गया था। दूसरा ओपीवी जनवरी, 2018 में लांच किया गया था। फिलहाल इसे समुद्री परीक्षण के लिये तैयार किया जा रहा है जब कि तीसरे और चौथे ओपीवी का सिस्टम इंटेग्रेशन चल रहा है। इन्हें इस साल के अंत तक लांच कर देने की तैयारी चल रही है।

लार्सन एंड टूब्रो प्राइवेट सेक्टर की ऐसी पहली कम्पनी है जिसने ऑफशोर पेट्रोल वेसेल का देश में ही डिजाइन और निर्माण किया है। कम्पनी के अधिकारियों का दावा है कि इसने देश की सभी नौसैनिक गोदियों के मुकाबले आर्डर दिये गए युद्धपोतों का वक्त से पहले निर्माण कर सौंपा है।

इस मौके पर लार्सन एंड टूब्रो के प्रबंध निदेशक और सीईओ एस एन सुब्रह्मण्यम ने कहा कि  राष्ट्र निर्माण में हमारी प्रतिबद्धता की वजह से ही हम श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र के लिये दीर्घकालीन प्रतिबद्धता की वजह से ही हमने कटपुल्ली शिपयार्ड में भारी निवेश किया है। देश की सेवा के लिये हमने देश में सात और रक्षा उत्पादन इकाइयों का निर्माण किया है।

लार्सन एंड टूब्रो अपने कोटुपल्ली शिपयार्ड में अगली पीढ़ी के सात ऐसे ऑफशोर पेट्रोल वेसेल बना रहा है। ये सभी पोत 2022 तक कोस्ट गार्ड को सौंप दिये जाएंगे।

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