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सियाचिन में तैनात जवानों के लिए जीवनदान हैं DRDO के ये 9 प्रोडक्ट

सियाचिन एक ऐसा युद्धक्षेत्र जहां पारा शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसी जगह जहां ठण्ड से हड्डियां भी कड़कड़ाने लगें। ऐसी जगह जहां हम और आप शायद पांच मिनट भी जीवित न रह सकें। लेकिन भारतीय सेना के जवान यहां कई माह तक तैनात रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यहां वे कैसे सर्वाइव करते हैं। आखिर हैं तो वे भी हमारी ही तरह इंसान। यहां उन्हें न सिर्फ ठण्ड बल्कि तमाम तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं लेकिन इनसे वे कैसे पार पाते हैं?  आज हम आपको इस बारे में बता रहे हैं कि आखिर कैसे इतने लम्बे समय तक ड्यूटी कर पाते हैं जवान-:





सैनिकों को ऊंचाई पर तैनाती के अनुकूल बनाया जाता है

बर्फीली पर्वतीय तैनाती के कठिन हालातों से निपटने के लिए इस बात का विशेष ख्याल रखा जाता है कि सैनिकों के शरीर को घातक नुक्सान न पहुंचे। तैनाती से पहले सैनिकों को विभिन्न ऊंचाइयों पर परिस्थितियों के अनुकूल बनाया जाता है। ताकि उनका शरीर बदलते मौसम और उच्च तंग क्षेत्र के अभ्यस्त हो सकें। इसके लिए उन्हें शारीरिक मानसिक और जैव रसायन और हार्मोन प्रोफाइल के आधार पर अनुकूल बनाया जाता है। पहले चरण में 2700 से 3600 मीटर दूसरे चरण में 3600 से 4500 मीटर और तीसरे व अंतिम चरण में सैनिकों को कुछ दिनों के लिए 4500 मीटर से ज्यादा उंचाई पर  रखकर भी माहौल के अनुकूल बनाया जाता है।

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