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ITBP की पहली महिला कॉम्बेट अफसर प्रकृति ने हटाया सरनेम, कहा लोग मुझे मेरे काम से जानें, न कि जाति से

प्रकृति

देहरादून। हाल ही में ITBP की कॉम्बैट टीम में शामिल होने वाली पहली महिला प्रकृति ने अपने नाम के साथ सरनेम लगाना बंद कर दिया है। एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में प्रकृति कहती हैं-व्यक्ति की पहचान उसकी जाति से नहीं होनी चाहिए। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे मेरे काम से जानें न कि मेरी जाति से। इसीलिए मैंने सरनेम लगाना बंद कर दिया है।





26 वर्ष की प्रकृति बिहार के समस्तीपुर की रहने वाली हैं। उनके पिता एयरफोर्स में हैं। प्रकृति का चयन आईटीबीपी में पहली लड़ाकू अधिकारी के रूप में हुआ है। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ऑफिसर भर्ती परीक्षा में पहली च्वाइस के रूप में ITBP का विकल्प चुना और सफलता के झंडे गाड़ दिए। प्रकृति की फिलहाल उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में ट्रेनिंग चल रही है।

अंग्रेजी अखबार से बातचीत में प्रकृति कहती हैं-बिहार में जाति बहुत महत्वपूर्ण है और लोग आपसे पहले आपका सरनेम देखते हैं। मैं एक व्यक्ति के रूप में कैसी हूं यह लोगों को दिखाना चाहती हूं। यही कारण है मैं अपने सरनेम का इस्तेमाल नहीं करती हूं।

अगले वर्ष तक असिस्टेंट कमांडेट के रूप में बटालियन को लीड करने की इच्छा रखने वाली प्रकृति को उम्मीद है कि उनकी कामयाबी और लड़कियों को प्रेरित करेगी। हालांकि वह यह भी कहती हैं कि जब उन्होंने परीक्षा दी थी तो उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह ऐसी पहली महिला अफसर बनेंगी।

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