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ईरान परमाणु समझौता टूटा- भारत सीधी निंदा से बचा

राष्ट्रपति ट्रंप और हसन रूहानी
राष्ट्रपति ट्रंप और हसन रूहानी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। ईरान और छह देशों के बीच परमाणु समझौते को अमेरिका द्वारा तोड़ देने की जहां यूरोपीय देशों सहित दुनिया की अग्रणी हस्तियों ने घोर निंदा की है भारत ने इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया ही दी है।





ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक ही सीमित रखने वाला यह समझौता तोड़ने के बाद अमेरिका ने ईऱान पर प्रतिबंध लगाने का एलान किया है जिससे भारत के आर्थिक और सुरक्षा हितों पर गहरी आंच आएगी। लेकिन अमेरिका के साथ गहराते सामरिक रिश्तों के मद्देनजर भारत ने इस पर कोई निंदात्मक बयान जारी नहीं किया।

इस बारे में यहां विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि भारत ने हमेशा ही माना है कि  ईरानी परमाणु समझौते के मसले को शांतिपूर्वक बातचीत और कूटनीति से सुलझाया जाना चाहिये। परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिये ईरान के अधिकार का आदर और इसके साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण सुनिश्चित करने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की गहरी रुचि को देखते हुए सभी पक्षों को उन मसलों पर बातचीत करनी चाहिये जो संयुक्त कार्य योजना के लिये संयुक्त समग्र समझौता (जेसीपीओए) से निर्देशित होती है।

क्या है ईरान परमाणु समझौता

12 वर्षों की गहन बातचीत के बाद ईरान और छह देशों के बीच जुलाई, 2015 में एक समग्र कार्ययोजना (जेसीपीओए) पर सहमति हुई थी।

समझौते में ईरान इस बात पर सहमत हुआ था कि वह अपने शांतिपूर्ण कार्यक्रम के बहाने परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। इस समझौते के बाद ईरान ने परमाणु केन्द्रों में इस्तेमाल होने वाले सेंट्रीफ्यूजों के दो तिहाई को निष्क्रिय कर दिया,  अपने परमाणु बिजली घरों से निकले एनरिच्ड यूरेनियम का 98 प्रतिशत हिस्सा बाहर भेज दिया। एनरिच्ड यूरेनियम से ही परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं। इसके साथ ही उसने अपने प्लूटोनियम पैदा करने वाले रिएक्टरों को कंक्रीट से भर दिया।

तेहरान इस बात के लिये भी तैयार हुआ कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी(आईएईए) उसके परमाणु केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर सकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान का कोई परमाणु केन्द्र परमाणु हथियार बनाने में तो नहीं जुटा है। आईएईए ने समझौता लागू होने के बाद दस बार ईरानी केन्द्रों का निरीक्षण कर यह प्रमाणित किया कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण दिशा में ही चल रहा है।

किन देशों के साथ ईरान ने समझौता किया

ईरान के साथ परमाणु समझौता करने वाली छह बड़ी ताकतों के गुट को पी-5 प्लस वन कहा जाता है। इन देशों में शामिल हैं- जर्मनी के अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य- अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस औऱ चीन।

ईरान परमाणु समझौते की पुष्टि बाद में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने की और यह अंतररारष्ट्रीय कानून बना। तब सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्यों ने सर्वसम्मति से इसे मंजूर किया था।

समझौता क्यों तोड़ा ?

डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान यह एलान किया था कि वह चुनाव जीते तो ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अलग हो जाएंगे। उन्होंने इस समझौते को खतरनाक बताया था। लेकिन शासन सम्भालने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने जब समझौता तोड़ने की बात की तो उनके विदेश मंत्रियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने इससे सहमति नहीं दिखाई। ट्रम्प ने इन्हें इस्तीफा देने को कहा और जब नये विदेश मंत्री माइक पाम्पियो और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन ने कार्यभार सम्भाला तब ट्रम्प समझौता तोड़ने में कामयाब हुए।

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले का सुरक्षा परिषद के बाकी चारों सदस्यों ने विरोध किया है।

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