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भारतीय नौसेना बनेगी ताकत, सभी मानेंगे इसका लोहा- रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली। हिंद प्रशांत के समुद्री इलाके में भारतीय नौसेना एक ताकत बनेगी जिसका लोहा सभी मानेंगे। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने यहां मंगलवार को नौसेना के कमांडरों के छमाही सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कमांडरों के साथ नौसेना की तैयारियों का जायजा लिया और आधुनिकीकरण की योजनाओं को जल्द लागू करने का संकल्प लिया।





युद्धपोतों, पनडुब्बियों विमानों की कमी पूरा करने के लिए उठाएंगे कदम

नौसेना के पोतों पर तैनात किये जाने वाले हेलीकाप्टरों, टोही विमान, मानवरहित विमान, पनडुब्बियों और युद्धपोतों की भारी कमी की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए रक्षा मंत्री ने वादा किया कि रक्षा मंत्रालय जल्द से जल्द इन कमियों को पूरा करने के कदम उठाएगा। रक्षा मंत्री ने बताया कि 32 हजार करोड़ रुपये की लागत के युद्धपोत प्रोजेक्टों का टेंडर निकल चुका है और इनके समझौते पूरे करने का काम तेजी से चल रहा है। रक्षा मंत्री ने कहा कि हथिय़ारों को तैनात करने वाले युद्धपोतों, बारूदी सुरंगों को नष्ट करने वाले पोतों, विमान वाहक पोतों के सहायक पोतों आदि को देश से ही हासिल करने का काम चल रहा है।

नौसेना के लिए तैयार कर रहे हैं स्पष्ट योजना

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण

रक्षा मंत्री ने कहा कि सम्मेलन काफी रचनात्मक रहा और हमने कमांडरों द्वारा उठाए गए मसलों पर खास चर्चा की। हम नौसेना के लिये एक स्पष्ट योजना तैयार कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने इस बात पर संतोष जाहिर किया कि अपने दायित्व के समुद्री इलाके में भारतीय नौसेना ने युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती से अपनी मजबूत मौजूदगी बनाई हुई है जिसकी बदौलत वह समुद्र में पैदा होने वाली विभिन्न चुनौतियों का मुकाबला कर सकेगी।

देश की समुद्री ताकत का प्रतीक है नौसेना

रक्षा मंत्री के साथ ग्रुप फोटो

रक्षा मंत्री ने कहा कि नौसेना देश की समुद्री ताकत का प्रतीक है और इसने अपने को सैन्य कूटनीति का एक अहम हिस्सा बना लिया है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर के तटीय देशों को समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निबटने में भारतीय नौसेना एक महत्वपूर्ण पड़ाव के तौर पर उभर चुकी है। उन्होंने कहा कि न केवल हिंद महासागर के तटीय देशों बल्कि दुनिया में अन्य देशों के साथ सहयोग कर नौसेना भारत की विदेश नीति के लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण जरिया भी बन चुकी है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि वह मानती हैं कि एक देश के तौर पर हम तब तक आत्मनिर्भर नहीं  बन सकते जबतक कि हम खुद ही अपने हथियार औऱ शस्त्र प्रणालियों का विकास नहीं करें। भारतीय नौसेना जिस तरह देश की सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियों और कम्पनियों के साथ तालमेल से काम करती है वह इसके संकल्प को दर्शाता है। मिसाल के तौर पर उन्होंने बताया कि देश में बन रहे विमानवाहक पोत का कम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम प्राइवेट सेक्टर की कम्पनी टाटा पावर एसईओ ने बनाया है। यह रक्षा मंत्रालय और प्राइवेट सेक्टर के बीच सामरिक साझेदारी की एक मिसाल है।

इसके अलावा भारतीय युद्धपोतों पर तैनात की जाने वाली इलेक्ट्रानिक युद्ध प्रणाली समुद्रिका का देश में ही पूरी तरह विकास किया गया है।

 

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