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‘दूसरे विश्व युद्ध’ के बाद पहली बार अंडमान व निकोबार में लड़ाकू विमान तैनात करेगा भारत

नई दिल्ली। दूसरे विश्व युद्ध के बाद भारत पहली बार अंडमान-निकोबार द्वीप पर लड़ाकू विमान तैनात करने की योजना बना रहा है। मीडिया खबरों के मुताबिक मलक्का, सुंदा, लुम्बोक और ओम्बई वेतार जलडमरूमध्य के साथ हिंद महासागर के पश्चिमी क्षेत्र में भारत अपनी पैठ मजबूत बनाने की कोशिश में है। ऐसा पहली बार होगा जब दूसरे विश्व युद्ध के बाद कोई भारतीय लड़ाकू विमान इस स्थान पर तैनात किये जाएंगे। मलक्का, सुंदा और लुम्बोक जलडमरूमध्य संकरे समुद्री रास्ते हैं, ये हिंद महासागर को दक्षिणी चीन सागर से जोड़ते हैं। वहीं चीन भी हिंद महासागरीय क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है।





समुद्री क्षेत्र पर चौकस निगरानी

पिछले कुछ वर्षों में चीनी युद्धपोत, पनडुब्बी तथा न्यूक्लियर सबमरीन भारत के हिस्से वाले समुद्री क्षेत्र में देखे गए थे।  हाल ही में एक ट्वीट में भारतीय नौसेना ने इसकी जानकारी भी दी थी और यह सन्देश भी दिया था कि वह अपने समुद्री क्षेत्र पर चौकस निगरानी रखे हुए है।

एक वेबसाइट पर प्रकाशित खबर के अनुसार सूत्रों का कहना है कि लड़ाकू विमानों के लिए अंडमान निकोबार कैंपबेल खाड़ी को संभावित बेस के तौर पर चिन्हित किया गया है। अभी तक रूस निर्मित एमआई17वी5 को निकोबार एयरबेस पर तैनात किया गया है।

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