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जयपुर फुट के जरिए भारत जीत रहा है दुनिया का दिल

सुधा चंद्रन

नई दिल्ली।  जहां एक और कुछ देश दूसरे देशों में अशांति फैलाने के लिये बारूद, बम और बंदूक का निर्यात कर लोगों को अपंग बना रहे हैं या मौत के घाट उतार रहे हैं वहीं भारत पिछले 50 बरसों से दूसरे देशों के लोगों की जिंदगी में सहारा बनने के लिये दूसरी किस्म के औजार मुहैया करा रहा है।





जयपुर फुट के जरिये भारतीय संस्था भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति ने विदेशों में भारतीय दूतावासों की मदद से 30 देशों में 70 कैम्प लगाए हैं जहां 27 हजार से अधिक अपंगों को कृत्रिम पांव लगा कर उन्हें चलने-फिरने लायक बनाया गया और उन्हें एक नया जीवन प्रदान किया है।

भारतीय राजनयिक इसे भारत की सॉफ्ट पावर यानी कोमल ताकत कहते हैं जिसके जरिये देशों और लोगों के दिल जीते जा रहे हैं।

महात्मा गांधी की 150 वीं सालगिरह के मौके पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने जयपुर फुट को सहारा बना कर अपनी कोमल ताकत को दुनिया के सामने पेश किया है। इसी इरादे से यहां नौ अक्टूबर को विदेशी राजदूतों की मौजूदगी में जयपुर फुट पर आधारित इंडिया फार ह्यूमैनिटी यानी मानवता के लिये भारत कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इसके जरिये अफ्रीकी देशों, इराक, अफ्रीका, लातिन अमेरिका,  प्रशांत सागर के द्वीपों, दक्षिण पूर्व एशिया और पड़ोस के अफगानिस्तान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव, इराक आदि देशों में विकलांगों को जयपुर फुट देने का बीड़ा विदेश मंत्रालय ने उठाया है।

इस मौके पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि विदेश नीति के जरिये न केवल देशों के बीच रिश्ते विकसित होते हैं बल्कि इसके जरिये हमारे पास जो कुछ है उन्हें साझा करने की कोशिश करते हैं। विदेश नीति के जरिये हम दूसरे देशों के लोगों तक पहुंचते हैं और सम्पर्क बनाते हैं। हम यह देखते हैं कि क्या हम दूसरे देशों के लोगों के जीवन में बदलाव ला सकते हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि जब से हमारी सरकार ने सत्ता सम्भाली है हमने अपनी विदेश नीति में  देखभाल,   निजी सम्पर्क और देश-विदेशों में अन्य हितधारकों के साथ मिलकर अपनी विदेश नीति में दया और सहानुभूति के पुट भरने की कोशिश की है।

हमारी विदेश नीति अपने साझा मसलों के हल के लिये साथ मिलने की बात है। हमें नहीं भूलना होगा कि हमारी हर विदेश नीति के पीछे और हमारे हर कदम के पीछे वह मानव होता है जिसकी बेहतरी की हम बात करते हैं और जिन्हें इसका लाभ मिलना चाहिये। चाहे वह पति द्वारा छोड़ी गई भारतीय नारी हो या किसी  विदेशी को भारत में इलाज के लिये वीजा की जरूरत हो भारत हमेशा ही मानवता के साथ पेश आया है।

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