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स्वतंत्रता दिवस स्पेशल: बंटवारे का दर्द बयां करने वाली ये 10 फिल्में क्या आपने देखी हैं ?

स्वतंत्रता दिवस





अंग्रेजी हुकूमत से लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त, 1947 को देश को आजादी तो मिली लेकिन साथ ही विभाजन का जख्म भी मिला। अंग्रेजों ने देश को दो भागों में बांट दिया। देश के बंटवारे की वजह से लाखों लोगों को अपना घर, अपना गांव छोड़कर काफी समय तक शरणार्थी शिविरों में रहना पड़ा। हालांकि बीते सात दशक में बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन अपनी जड़ों से कट जाने का दर्द लोगों को आज भी सालता है। उस तीसरी, चौथी पीढ़ी को भी जिसने अपने पिताओं और दादाओं से इस बारे में सिर्फ किस्से ही सुने हैं। विभाजन का यह दर्द हिन्दी फिल्मों में भी बेहद मार्मिक तरीके से व्यक्त हुआ है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आज हम आपको विभाजन पर बनी कुछ फिल्मों के बारे में बता रहे हैं।

छलिया (1960)

छलिया

देश के बंटवारे का दंश सबसे ज्यादा महिलाओं को झेलना पड़ा। फिल्म की शुरुआत ट्रेन में सफर कर रही कुछ लड़कियों से होती हैं। ये वह लड़कियां हैं जो बंटवारे के वक्त अपने परिवारों से बिछुड़ गईं। यह लड़कियां पांच बरस बाद पाकिस्तान से भारत आ रही हैं। सभी को खुशी है कि लंबे समय बाद वे अपने परिवारों से मिल पाएंगी। लेकिन उनके सपने उस वक्त टूट जाते हैं जब उन्हें उनके मां-बाप और ससुराल वाले अपनाने से इंकार कर देते हैं। समाज के लोक लिहाज के सामने रिश्ते छोटे पड़ जाते हैं। राजकपूर, नूतन और रहमान की मुख्य भूमिकाओं वाली इस फिल्म का निर्देशन किया था विख्यात निर्देशक मनमोहन देसाई ने। बतौर निर्देशक यह उनकी दूसरी फिल्म थी। टिकट खिड़की पर फिल्म कामयाब रही थी।

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