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इमरान जीते तो चीन-पाक आर्थिक गलियारा खटाई में ?

पाक चुनाव में इमरान
पाक चुनाव रैली में इमरान खान (सौजन्य- गूगल)

लॉस एंजेल्स से ललित मोहन बंसल…

पाकिस्तानी आम चुनाव के नतीजे यदि इमरान खान के पक्ष में गए तो क्या चीन द्वारा बनाए जा रहे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा के भविष्य पर आंच आएगीअमेरिकी मीडिया में इसे लेकर शक जाहिर किये जा रहे हैं। पाकिस्तान में इन दिनों सेना के समर्थन में नई सरकार के गठन में आतुर पूर्व क्रिकेटर की पार्टी ‘पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ़’ पहले दिन से ही इस परियोजना के पीछे हाथ धोकर पड़ी है। इमरान का कहना  है कि तत्कालीन प्रधान मंत्री नवाज़ शरीफ़ ने सोचे समझे बिना इस परियोजना को आँख मूँद कर मंज़ूरी दे दी। उन्होंने इस के लिए अन्तर्राष्ट्रीय क़ायदेक़ानूनों की भी परवाह नहीं की तथा एक तानाशाह के रूप में मनचाहे सौदे कर लिए।  25 जुलाई को हो रहे  इन चुनावों में भले ही एक दर्जन पार्टियाँ चुनाव मैदान में हैं लेकिन मुक़ाबला पाकिस्तान मुस्लिम लीगनवाज़पाकिस्तान पीपल्स पार्टी और पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ़ के बीच है। पिछले दिनों देश की सुप्रीम कोर्ट ने नवाज़ शरीफ़ को कथित भ्रष्टाचार के आरोप में दस साल की सज़ा दे कर अदीयाला जेल में ठूँस दिया हैहालाँकि वह सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले को सही नहीं ठहराते और इसमें मिलिट्री की सोची समझी साज़िश बता रहे हैं। इस फ़ैसले से चीन को झटका लगा है और उसने मौजूदा अंतरिम सरकार से परियोजना के बारे में बातचीत करने से भी इनकार कर दिया है।





यह  चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग  की एक महत्वाकांक्षी योजना है। उन्होंने इसकी शुरुआत एक मित्र देश पाकिस्तान से की और इसे एक आदर्श माडल के रूप में 62 अरब डालर ख़र्च किए जाने का प्रावधान कराया। इसके लिए पाकिस्तान के प्रधान मंत्री नवाज़ शरीफ़ को भरोसे में ले कर सी पी ई सी कारिडोर परियोजना में पोर्टरेलवेसड़क और पाईपलाइन के ज़रिए इंफ़्रास्ट्रक्चर पर पिछले तीन सालों में आधी से अधिक धनराशि व्यय की । नवाज़ शरीफ़ के आग्रह पर लाहौर में मेट्रो रेल परियोजना का निर्माण कार्य भी शुरू करा दियाहालाँकि इसका देश भर में ख़ासा विरोध हो रहा है। इस पर नवाज के अनुरोध पर चीन ने पेशावरक्वेटा और कराची में भी मेट्रो निर्माण का फ़ैसला लिया जा चुका है। इन परियोजनाओं के पीछे शी चिन फिंग का उद्देश्य पाकिस्तान के माडल पर दुनिया के विभिन्न भागों में ऐसे अनेक कॉरिडोर बनाना था कि वह व्यापार के भरोसे दुनिया का दिल जीत सके। हालाँकि भारत और यूरोप के कुछेक देश बेल्ट एंड रोड परियोजना में पारदर्शिता नहीं बरते जाने के ख़िलाफ़ पहले से ही अंगुली उठाते आ रहे हैं।

इन योजनाओं में अभी तक 19 अरब डालर की योजनाएँ पूरी हो चुकी हैं अथवा समाप्ति के क़रीब बताई जाती है। इन परियोजनाओं में लाहौर में ओरेंज लाइन मेट्रों का काम बाइस महीनों तक बंद रहने के बाद पिछले दिनों शुरू हुआ है। दो अरब डालर की यह परियोजना पूर्व प्रधान मंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनके भाई तथा पंजाब के पूर्व मुख्य मंत्री शहबाज़ शरीफ़ पर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों और अदालती विवादों के कारण कटघरें में आ चुकी है। इधर पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति दिन पर ख़राब होती जा रही है। उसे करेंट अकाउंट बरक़रार रखने के लिए जहाँ चीन से हाल में तीन अरब डालर दो प्रतिशत ब्याज पर लेना पड़ा हैवहीं आई एम एफ ने भी आठ से दस अरब डालर के ऋण नहीं चुकाए जाने के कारण पाकिस्तान की नई सरकार पर संकट खड़े करने की धमकी दे दी है।

वाल स्ट्रीट जर्नल की माने तो पाकिस्तान में 25 जुलाई को होने वाले चुनाव में पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीके इंसाफ़ (पीटीआई)  सेना के  समर्थन से जीत सकती है। इमरान की पार्टी को मिलिट्री और ख़ुफ़िया एजेंसी का समर्थन बताया जाता है। इमरान खान चुनावी सभाओं में चीनी परियोजनाओं में नवाज़ शरीफ़ को भारी घूस दिए जाने के आरोप लगा चुके हैं। चीन ने पाकिस्तान की विभिन्न योजनाओं में कोयला और धातुसड़क मार्गहाइड्रोरेल मार्गसोलर और विंड ऊर्जा पर 62 अरब डालर लगाने की परियोजनाएँ शुरू की थीं। इनमें बलूचिस्तान में ग्वादार बंदरगाह परियोजना भी पूरी नहीं हो सकी है। इसमें कार्गो ट्रैफ़िक बहुत कम हैतो वहाँ रोज़गार की समस्या मूँह बाएँ खड़ी है। चीन सरकार ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं और वह नई सरकार से ही बातचीत कर आगे क़दम बढ़ाना चाहती है।

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