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‘आवारा’ और ‘अनाड़ी’ कैसे बना एयरफोर्स में फ्लाइट लेफ्टिनेंट, 6 रोचक बातें

हिन्दी सिनेमा में शो मैन का खिताब तो कई निर्देशकों को मिला लेकिन सही मायनों में असली शो मैन तो राजकपूर ही थे। हालांकि राजकपूर का नाम लेते ही ‘आवारा’ और  ‘अनाड़ी’ फिल्मों के किरदार जेहन में कौंधते हैं। यह सही है कि फिल्मों में उन्होंने ज्यादातर भोले-भाले युवक की भूमिकाएं निभाईं लेकिन जासूस और वकील जैसे वे किरदार भी उन्होंने निभाए जिसमें भोलापन काम नहीं आता। इसके अलावा वे पुलिस हवलदार और एयरफोर्स के अफसर की भूमिका में भी नजर आए। आज हम आपको उनके कुछ ऐसे ही किरदारों और उनके जीवन से जुड़े ऐसे प्रसंगों के बारे में बता रहे हैं जिनकी ज्यादा चर्चा नहीं होती।





इस फिल्म में बने एयरफोर्स के अफसर

फिल्म संगम

वर्ष 1964 में प्रदर्शित ‘संगम’ फिल्म का निर्देशन भी राजकपूर ने किया था। फिल्म में उनकी अहम भूमिका थी। प्रेम त्रिकोण पर बनी यह फिल्म बॉक्स आफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी। वैजयंती माला और राजेन्द्र कुमार फिल्म के अन्य सितारे थे। राजकपूर ने इस फिल्म में फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुंदर खन्ना का किरदार निभाया था। राजेन्द्र कुमार ने गोपाल और वैजयंती माला ने राधा का किरदार निभाया। राधा गोपाल से प्रेम करती है लेकिन जब गोपाल को पता चलता है कि सुंदर राधा को चाहता है तो वह रास्ते से हट जाता है लेकिन बरसों बाद एक पत्र सुंदर और राधा के वैवाहिक जीवन में आग लगा देता है। ‘संगम’ अपने दौर की सबसे लंबी फिल्मों में से एक थी। कहते हैं राजकपूर इस फिल्म में दिलीप कुमार को लेना चाहते थे और उन्होंने दिलीप के सामने प्रस्ताव रखा कि वह गोपाल और सुंदर के रोल में से जो चाहें कर सकते हैं। पर दिलीप कुमार ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। बताते हैं इसके बाद गोपाल की भूमिका के लिए राजकपूर के जेहन में दो नाम थे राजेन्द्र कुमार और फिरोज खान के। कहते हैं फिरोज खान को उन्होंने कहा कि अगर राजेन्द्र कुमार ने हां नहीं कही तो यह रोल वह करेंगे लेकिन राजेन्द्र ने गोपाल की भूमिका स्वीकार कर ली और इस तरह राजकपूर के साथ काम करने की फिरोज खान इच्छा पूरी न हो सकी। फिल्म के सभी गाने सुपरहिट साबित हुए। ‘बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं…’ और ‘ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर तुम नाराज न होना…’ के रचे जाने की भी कहानी बड़ी दिलचस्प है। बताते हैं राजकपूर ने राधा का किरदार वैजयंती माला को सुनाया लेकिन जब कई दिन तक वैजयंती माला ने राधा की भूमिका निभाने या न निभाने के बारे में कोई जवाब नहीं दिया तो राजकपूर ने एक दिन वैजयंती माला को टेलीग्राम किया बोल राधा बोल यह संगम होगा कि नहीं। वैजयंती माला ने भी टेलीग्राम से जवाब दिया होगा… होगा…होगा..। और इस तरह ‘बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं…’ गीत की रचना हुई। फिल्म की शूटिंग के दौरान ही संगीतकार जयकिशन किसी बात पर गीतकार हसरत जयपुरी से नाराज हुए तो उन्होंने  ‘ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर तुम नाराज न होना…’ गीत की रचना कर दी। इसी फिल्म से राजकपूर ने पहली बार फिल्म संपादन का काम भी संभाला। इसके बाद ‘मेरा नाम जोकर’, ‘बॉबी’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’, ‘प्रेम रोग’ और ‘राम तेरी गंगा मैली’ का संपादन भी किया।

इस फिल्म में बने थे पहली बार वकील

फिल्म वकील बाबू

निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म  ‘अनहोनी’ में राजकपूर पहली बार वकील बने। इस फिल्म में नायिका की भूमिका निभाई थी नरगिस ने। नरगिस का इस फिल्म में डबल रोल था। रोशन के संगीत और अली सरदार जाफरी के गीतों से सजी इस फिल्म के गाने बेहद लोकप्रिय हुए। इसके अलावा राजकपूर एक और फिल्म ‘वकील बाबू’ में वकील बने। यही वह फिल्म थी जिसमें राजकपूर आखिरी बार पर्दे पर दिखे।

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