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नक्सलियों की बारूदी सुरंगों का पता लगाने की तकनीक जवानों के पास नहीं: गृह मंत्रालय

नक्सली ने किया IED ब्लास्ट
नक्सली ने किया IED ब्लास्ट (प्रतीकात्मक)

नई दिल्ली। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के अनुसार गृह मंत्रालय ने संसदीय पैनल को बताया है कि सुरक्षा बलों के पास जो मौजूदा तकनीक है, उससे नक्सली हिंसक वारदातों से जूझ रहे इलाकों में गहरी बारूदी सुरंगों का पता नहीं लगाया जा सकता। बता दें कि गत 13 मार्च को छत्तीसगढ़ के सुकमा में 9 CRPF जवानों की उस वक्त मौत हो गई थी जब उनकी गाड़ी बारूदी सुरंग के विस्फोट के चपेट में आ गई।





नक्सलियों ने इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) को सड़क में गहराई से खोदकर लगाया था, जिसे सुरक्षा बल अपनी सर्च डिवाइस की मदद से भी नहीं खोज सके। बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व वाली अनुमान समिति ने सोमवार (19 मार्च) को संसद में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां- मूल्यांकन और प्रतिक्रिया तंत्र की एक रिपोर्ट रखी।

गृह मंत्रालय के एक प्रतिनिधि ने नक्सल प्रभावित इलाकों में हिंसा के मद्देनजर अनुमान समिति के सामने साक्ष्य पेश करते हुए कहा कि वर्तमान में हम तकनीकी रूप से गहरी बारूदी सुरंगों का पता लगाने में सक्षम नहीं है। वे (उग्रवादी) अपने काम करने का ढंग भी बदलते रहते हैं। पर इसके बाद भी खुफिया और तकनीकी सहायता के साथ सोचा जाने योग्य बचाव किया जा रहा है।

गृह मंत्रालय प्रतिनिधि ने आगे कहा- हमने सैन्य अधिकारियों को ट्रेनिंग और ऑपरेशन दोनों के लिए रखा है। लेकिन अहम बात यह है कि यदि हम इस महीने विचार करते हैं तो केवल तीन ब्लास्ट हुए। ऐसे दो मामलों में हम खोजी डॉग्स का इस्तेमाल कर रहे थे। पहले धमाका करने के लिए बटन दबाया जाता था। अनजान आदमी जब माइन पर पैर रखता था तब धमाका होता था। आज यह देखा जाता है कि अगर गुजरते समय हमारा कपड़ा भी फंस जाता है तो बारूदी सुरंग सक्रिय हो जाती है और धमाका हो जाता है।

 

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