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यहां गढ़े जाते हैं भारतीय सेना के अफसर, ‘सैनिक स्कूल’ से जुड़ी ये 9 बातें

ये अन्य स्कूलों जैसे हैं, लेकिन यहां स्टूडेंट्स की दिनचर्या आम स्कूलों के स्टूडेंट्स जैसी नहीं होती। इन स्कूलों में बच्चों को अनुशासन और विनम्रता सिखाने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को पंख दिए जाते हैं। यहां छोटी कक्षाओं से ही उनमें नेतृत्व की क्षमता विकसित की जाती है ताकि वे आगे चलकर देश की सेनाओं में एक कुशल अफसर के रूप में अपना योगदान दे सकें। ये हैं देश के ‘सैनिक स्कूल’ जो रचते हैं प्रतिभाशाली और जांबाज आर्मी ऑफिसर्स। आइये जानते हैं इन स्कूलों से जुड़ी कुछ खास बातें:-





1961 शुरू हुए थे सैनिक स्कूल

सैनिक स्कूल ऐसा स्कूल सिस्टम है जिसका प्रबंधन रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सैनिक स्कूल सोसाएटी द्वारा किया जाता है। 1961 में भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री वी.के. कृष्ण मेनन ने भारतीय सेना के अधिकारी कैडर में क्षेत्रीय और वर्ग असंतुलन को सुधारने के लिए तथा ‘राष्ट्रीय रक्षा अकादमी’ (NDA), खडकवासला पुणे और ‘इंडियन नेवल एकेडमी’ में प्रवेश को आसान बनाने के लिए छात्रों को तैयार करने के लिए, सभी राज्यों में सैनिक स्कूलों की कल्पना की थी।

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