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अर्जुन की ध्वजा पर हनुमान, आइए जानें प्राचीन युद्धों से जुड़ी ऐसी ही 6 रोचक बातें

प्राचीन काल में युद्ध के दौरान अस्त्र-शस्त्र, हाथी सेना, पैदल सेना, अश्व सेना, शिविर, छावनी, दूत, सैन्य अस्पताल जैसे तथ्यों का विवरण मिलता है। अथर्ववेद, ऋग्वेद, महाभारत ग्रंथ, अर्थशास्त्र आदि प्राचीन ग्रंथों में विस्तार से उल्लेख मिलता है। आप ने रामायण और महाभारत धारावाहिकों में इन कुछ तथ्यों के बारे में देखा होगा और कुछ विवरणों को किताबों में पढ़ा होगा। आइए आज दीपावली के पर्व पर जानते हैं प्राचीन युद्धों से जुड़े कुछ ऐसे ही रोचक तत्थों बारे में-





ऐसा था महाभारत काल में अर्जुन का ध्वज

अर्जुन का ध्वज

महाभारत ग्रंथ में ध्वजाओं का पूरा विवरण दिखाई देता है। इस युग में भिन्न-भिन्न आकार, रंग, योजना के झंडों का प्रयोग होता था। योद्धाओं और राजाओं के ध्वज अलग-अलग होते थे। धनुर्धर अर्जुन की ध्वजा पर हनुमान का चित्र था। उसमें सिंह की पूंछ भी चित्रित रहती थी।

प्राचीन काल में इस तरह होता था हाथी युद्ध

युद्ध में इसलिए महत्वपूर्ण थे हाथी

प्राचीन काल में सामान्य तौर पर हाथी युद्ध हाथी से ही होता था। प्रशिक्षित घोड़े भी हाथी से लड़ते थे। पैदल सेना का हाथी से लड़ना वर्जित था। भारतीय चतुरंगिणी सेना में हस्ति दल एक प्रमुख घटक था। ऋगवैदिक काल से ही हाथी की युद्ध में उपयोगिता स्वीकार की जाने लगी थी। नदी पार करने, शिविर निर्माण, आग लगाने-बुझाने तथा जल में घुसकर लड़ने में हाथी की विशेष भूमिका होती थी।

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