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फुरसत में : नायक-खलनायक से लेकर फौजी और पुलिस अफसर हर अभिनय में जमाया रंग, जानें 15 बातें

लगभग चार दशक के लंबे अभिनय जीवन में संजय दत्त परदे पर कभी नायक बनकर आए तो कभी खलनायक। उनकी एक फिल्म का तो नाम ही ‘खलनायक’ था। इन चालीस वर्षों में संजय दत्त ने लगभग हर तरह के किरदार निभाए। प्रोफेसर, डॉक्टर, वकील, बिजनेसमैन से लेकर पुलिस अफसर और फौजी भी वह कई फिल्मों में बने। आज हम आपको संजय दत्त की ऐसी कुछ फिल्मों के बारे में बताएंगे जिनमें उन्होंने पुलिस अफसर और फौजी का रूप धरा।





‘नामो निशान’

वर्ष 1987 में आई इस फिल्म में संजय दत्त ने ऐसे इंस्पेक्टर सूरज का किरदार निभाया है जो एक शख्स को हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर फांसी के फंदे तक पहुंचा देता है। सूरज नहीं जानता कि वह उसका पिता है और जिस पुलिस अफसर संग्राम सिंह को वह अपना पिता मानता है उसने तो उसका सिर्फ लालन-पालन किया है। अस्सी के दशक की फिल्मों के तमाम फार्मूले इस फिल्म में है। वह खलनायकों की तमाम साजिशों को बेनकाब कर अंततः अपने पिता को बेगुनाह साबित करता है। शशि कपूर, कादर खान और अमृता सिंह की भी फिल्म में अहम भूमिकाएं हैं।

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