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राफेल सौदे पर राहुल के बयान से फ्रांस ने किनारा किया

राफेल-विमान

नई दिल्ली।  लोकसभा में शुक्रवार को  अविश्वास प्रस्ताव पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल  गांधी द्वारा राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर लगाए गए आरोपों से फ्रांस ने किनारा कर लिया है।





संसद में अपने भाषण में राहुल गांधी ने कहा था कि गोपनीयता की आड़ में एनडीए सरकार राफेल सौदे की जानकारी नहीं दे रही है जब कि राहुल गांधी के मुताबिक फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से जब उनकी बातचीत हुई तब उन्होंने गोपनीयता के आवरण से इनकार किया।

राहुल गांधी ने कहा था कि उनके कार्यकाल में एक राफेल विमान की कीमत 520 करोड़ रुपये तय हुई थी जब कि एनडीए सरकार ने इसे 16 सौ करोड़ में तय किया।

राहुल गांधी के बयान के तुरंत बाद सदन में मौजूद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच आपसी रक्षा आदान प्रदान के लिये गोपनीयता का समझौता वर्ष 2008 में यूपीए सरकार के दौरान सम्पन्न हुआ था।

इस मसले पर बढ़ते विवाद के बाद यहां फ्रांस के दूतावास ने एक बयान जारी कर कहा कि संसद में हमने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान को नोट किया है। भारत और फ्रांस ने 2008 में एक सिक्युरिटी अग्रीमेंट सम्पन्न किया था ताकि एक दूसरे द्वारा दी गई गोपनीय जानकारी की रक्षा की जा सके। इसका भारत और फ्रांस के रक्षा साज-सामान के सुरक्षा और ऑपरेशनल क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

दूतावास ने कहा कि यह समझौता स्वाभाविक तौर पर 23 सितम्बर, 2016 में सम्पन्न हुए राफेल विमान सौदे पर भी लागू होता है। इस सौदे के तहत 36 राफेल लड़ाकू विमान और सहायक उपकरण खरीदे गए थे।

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