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प्रथम विश्व युद्ध के सैनिक होंगे सम्मानित, जीवित बचे इंडियन पायलट भी शामिल

लंदन। ब्रिटिश सरकार ने फस्ट वर्ल्ड वार में भाग लेने वाले 30 लाख से ज्यादा राष्ट्रमंडल के सैनिकों, नाविकों, वायु सैनिकों और श्रमिकों के सम्मान में विदेशी एवं राष्ट्रमंडल कार्यालय (FCO) पर स्मारक बनवाने की घोषणा की है। इन जवानों में भारतीय भी शामिल थे।





फस्ट वर्ल्ड वार में करीब 20 लाख भारतीय सैनिक शामिल हुए थे। भारतीय हरदुत्त सिंह मलिक शुरू में कोर के लिए क्वालीफाई नहीं हो पाए थे पर युद्ध में वह अकेले जीवित बचे विमान चालक के रूप में उभरे थे। उस युद्ध में 90 लाख से ज्यादा सैनिक मारे गए थे। इनमें 10 लाख सैनिक राष्ट्रमंडल देशों के थे। इन सैनिकों ने ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, इटली और अमेरिका की गठबंधन सेना को जीत दिलाने में मदद की थी।

प्रथम विश्व महायुद्ध

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने कहा कि फस्ट वर्ल्ड वार में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के सम्मान में वह संसद के अन्य सदस्यों की ही तरह खादी की पॉपी पहनेंगी। ‘पॉपी अपील’ युद्ध में लड़े सैनिकों के लिए कोष जुटाने का एक वार्षिक अभियान है, जो 11 नवंबर को ‘आर्मीस्टिस डे’ से पहले तक चलाया जाता है।

उल्लेखनीय है कि 11 नवंबर, 1918 को प्रथम विश्व युद्ध खत्म हो गया था और देशभर में राजनीति से जुड़े लोगों एवं अन्य ने युद्ध में मारे गए लोगों के प्रति सम्मान दिखाने के लिए कपड़े से बनी पॉपी पहनी थी। हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य एवं भारतीय मूल के जीतेश गढ़िया और रॉयल ब्रिटिश लीजन ने युद्ध में अविभाजित भारत के योगदान की याद दिलाने के प्रतीक के तौर पर इस वर्ष पहली बार खादी की पॉपी बनाई है।

ब्रिटेन की पीएम थेरेसा ने हाउस ऑफ कॉमन्स में कहा था कि अविभाजित भारत के 74,000 सैनिकों ने लड़ते हुए बलिदान दिया, उनमें से 11 को कई महाद्वीपों में जंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने और उत्कृष्ट स्तर की बहादुरी दिखाने के लिए ‘विक्टोरिया क्रॉस’ दिया गया था।

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